ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1610, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त—३२ देवता—विश्वेदेव प्र सु ग्मन्ता धियसानस्य सक्षणि वरेभिर्वरॉ अभि षु प्रसीदतः. अस्माकमिन्द्र उभयं जुजोषति यत्सोम्यस्यान्धसो बुबोधति.. (१) इंद्र अपने घोड़े इंद्रागमन की चिंता करने वाले मुझ यजमान के यज्ञ में आने के लिए हांकते हैं. उत्तम मार्गों से हवि देने वाले यजमान के हव्य और स्तुतियों को लक्ष्य करके इंद्र आवें. इंद्र आकर हमारा हव्य भक्षण करें एवं स्तुतियां सुनें. इंद्र मेरे सोमरस और हव्य का स्वाद लेते हैं. (१) वीन्द्र यासि दिव्यानि रोचना वि पार्थिवानि रजसा पुरुष्टुत. ये त्वा वहन्ति मुहुरध्वराँ उप ते सु वन्वन्तु वग्वनाँ अराधसः.. (२) हे बहुतों द्वारा प्रशंसित इंद्र! तुम दिव्य प्रकाश को धरती पर फैलाते हुए जाते हो. तुम्हारे घोड़े तुम्हें बार-बार ढोकर हमारे यज्ञ की ओर लावें. वे घोड़े हम धनहीन स्तोताओं को धनसंपन्न करें. (२) तदिन्मे छन्त्सद्वपुषो वपुष्टरं पुत्रो यज्जानं पित्रोरधीयति. जाया पतिं वहति वग्नुना सुमत्पुंस इद्भद्रो वहतुः परिष्कृतः.. (३) इंद्र मुझे वही चमत्कारपूर्ण एवं धन के समान जन्म देने की कृपा करें, जिसे पाकर पुत्र पिता का धन प्राप्त करता है. यजमान की पत्नी यजमान को भले शब्दों द्वारा अपने पास बुलाती है. सोमरस उस उत्तम पुरुष के पास भली प्रकार जावे. (३) तदित्सधस्थमभि चारु दीधय गावो यच्छासन्वहतुं न धेनवः. माता यन्मन्तुर्यूथस्य पूर्व्याभि वाणस्य सप्तधातुरीज्जनः.. (४) हे इंद्र! उस स्थान को अपने तेज से प्रकाशित करो, जहां स्तुतिरूप धारिणी गाएं मिलती हैं. स्तुतियों की प्राचीन एवं पूजा योग्य माता गायत्री के सातों छंद उसी स्थान पर हैं. (४) प्र वोऽच्छा रिरिचे देवयुष्पदमेको रुद्रेभिर्याति तुर्वणिः. जरा वा येष्वमृतेषु दावने परि व ऊमेभ्यः सिञ्चता मधु.. (५) हे यजमानो! देवों की अभिलाषा करते हुए अग्नि तुम्हारे स्थान पर जाते हैं. अकेले इंद्र रुद्रों के साथ होताओं के पास से तुम्हारे यज्ञ में शीघ्र आते हैं. स्तुति भी इन मरणरहित देवों से धन दिलाने में समर्थ होती है. तुम अपने रक्षक देवों के लिए सोमरस पिलाओ. (५) निधीयमानमपगूहह्मप्सु प्र मे देवानां व्रतपा उवाच. इन्द्रो विद्वाँ अनु हि त्वा चचक्ष तेनाहमग्ने अनुशिष्ट आगाम्.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*