ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1611, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंदेवों में उत्तम एवं यज्ञों की रक्षा करने वाले इंद्र ने अध्वर्यु द्वारा जल में निहित अग्नि के विषय में बताया है. हे अग्नि! विद्वान् इंद्र ने तुम्हें बाद में देखा था, मैं उसी इंद्र के उपदेश के अनुसार तुम्हारे पास आया हूं. (६) अक्षेत्रवित्क्षेत्रविदं ह्यप्राट् स प्रैति क्षेत्रविदानुशिष्टः. एतद्वै भद्रमनुशासनस्योत स्रुतिं विन्दत्यञ्जसीनाम्.. (७) मार्ग न जानने वाले लोग जानने वालों से पूछते हैं. मार्ग जानने वाले के निर्देश के अनुसार वह इच्छित स्थान पर पहुंच जाता है. इसी अनुशासन के द्वारा खोजने पर जल का मार्ग प्राप्त हो सकता है. (७) अद्येदु प्राणीदममन्निमाहापीवृतो अध्यन्मातुरूथः. एमेनमाप जरिमा युवानमहेळन्वसुः सुमना बभूव.. (८) ये अग्नि आज ही अरणिमंथन से उत्पन्न हुए हैं. सोमरस निचोड़ने वाले इन्हें अन्यत्र ले जाना चाहते हैं. तेज से ढके हुए अग्नि, धरतीमाता के दूध के समान सोमरस पीते हैं. नित्य युवा अग्नि को हव्यों से मिली हुई स्तुति प्राप्त होती है. इस हेतु अग्नि क्रोधरहित, धन देने वाले एवं शोभन मनयुक्त हुए हैं. (८) एतानि भद्रा कलश क्रियाम कुरुश्रवण ददतो मघानि. दान इद्धो मघवानः सो अस्त्वयं च सोमो हृदि यं बिभर्मि.. (९) हे कलावान् एवं स्तोताओं की स्तुतियां सुनने वाले इंद्र! तुम स्तोताओं को धन देते हो. हे स्तोत्ररूपी धन वाले स्तोताओ! यह इंद्र तुम्हारे प्रति दाता ही रहें. जिस सोम को मैं पेट में रखता हूं, वे भी तुम्हारे लिए दाता रहें. (९) सूक्त—३३ देवता—कुरुश्रवण प्र मा युयुज्रे प्रयुजो जनानां वहामि स्म पूषणमन्तरेण. विश्वे देवासो अध मामरक्षन्दुःशासुरागादिति घोष आसीत्.. (१) यजमानों को यज्ञकर्मों में नियुक्त करने वाले देवों ने मुझ कषव ऋषि को कुरुश्रवण के प्रति नियुक्त किया है. मैंने पूषा को मार्ग से वहन किया है. सभी देवों ने मेरी रक्षा की. चारों ओर यह हल्ला मचा हुआ था कि कठिनता से वश में आने वाला ऋषि आ गया है. (१) सं मा तपन्त्यभितः सपत्निरिव पर्शवः. नि बाधते अमतिर्नग्नता जसुर्वेर्न वेवीयते मतिः.. (२) मेरी पसलियां मुझे सौत स्त्रियों के समान बहुत दुःख दे रही हैं. बुद्धिहीनता, नग्नता और ebook converter DEMO Watermarks*