भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1612, कुल 1855 में से

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दुर्बलता मुझे पीड़ित कर रही हैं. मेरी बुद्धि उसी प्रकार कांपती है, जिस प्रकार शिकारी को देखकर पक्षी कांपते हैं. (२) मूषो न शिश्ना व्यदन्ति माध्यः स्तोतारं ते शतक्रतो. सकृत्सु नो मघवन्निन्द्र मृळयाधा पितेव नो भव.. (३) हे इंद्र! चूहे जिस प्रकार तांत को खाते हैं, उसी प्रकार मेरी मानसिक चिंताएं मुझे खाए जा रही हैं. हे शतक्रतु इंद्र! मैं तुम्हारा स्तोता हूं. हे धनस्वामी इंद्र! एक बार मेरी रक्षा करो एवं मेरे पिता के समान बनो. (३) कुरुश्रवणमावृणि राजानं त्रासदस्यवम्. मंहिष्ठं वाघतामृषिः.. (४) मैं कवष ऋषि यजमानों को देने के लिए श्रेष्ठ धनदाता एवं त्रसदस्यु के पुत्र कुरुश्रवण के पास धन मांगने गया था. (४) यस्य मा हरितो रथे तिस्रो वहन्ति साधुया. स्तवै सहस्रदक्षिणे.. (५) जब मैं रथ में बैठता था, तब हरे रंग के तीन घोड़े मुझे भली प्रकार ढोते थे. यज्ञ में हजारों स्वर्ण मुद्राएं पाने वाला मैं लोगों द्वारा प्रशंसित होता था. (५) यस्य प्रस्वादसो गिर उपमश्रवसः पितुः. क्षेत्रं न रण्वमूचुषे.. (६) हे राजन्! यश की चर्चा चलने पर लोग तुम्हारे पिता का दृष्टांत देते थे. उनकी बातें मुझे इस प्रकार रुचिकर लगती थीं, जिस प्रकार सेवकों को इनाम में दिया हुआ खेत लगता है. (६) अधि पुत्रोपमश्रवो नपान्मित्रातिथेरिहि. पितुष्टे अस्मि वन्दिता.. (७) हे दृष्टांतयोग्य कीर्ति वाले मित्रातिथि के पुत्र! तुम मेरे पास आओ. मैं तुम्हारे पिता का स्तोता हूं. (७) यदीशीयामृतानामुत वा मर्त्यानाम्. जीवेदिन्मघवा मम.. (८) यदि मैं मरणरहित देवों और मरणशील मानवों का स्वामी होता तो मुझे धन देने वाले अर्थात् तुम्हारे पिता जीवित रहते. (८) न देवानामति व्रतं शतात्मा चन जीवति. तथा युजा वि वावृते.. (९) सौ आत्माओं वाला व्यक्ति भी देवों की मर्यादा लांघकर जीवित नहीं रह सकता. इसी कारण साथियों से हमारा वियोग होता है. (९) ebook converter DEMO Watermarks*