भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1621, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1621

येन सूर्य ज्योतिषा बाधसे तमो जगच्च विश्वमुदियर्षि भानुना. तेनास्मद्विश्वामनिरामनाहुतिमपामीवामप दुष्ष्वप्न्यं सुव.. (४) हे सूर्य देव! तुम जिस ज्योति से अंधकार का नाश करते हो एवं जिस किरण से सारे संसार को चमकाते हो, उसी के द्वारा हमारा अन्नाभाव, यज्ञहीनता, रोगसमूह एवं बुरे स्वप्न नष्ट करो. (४) विश्वस्य हि प्रेषितो रक्षसि व्रतमहेळयन्नुच्चरसि स्वधा अनु. यदद्य त्वा सूर्योपब्रवामहै तं नो देवा अनु मसीरत क्रतुम्.. (५) हे प्रेरित सूर्य देव! तुम क्रोध न करते हुए सभी यजमानों के यज्ञों की रक्षा करते हो एवं प्रातःकाल के यज्ञ के बाद उदित होते हो. आज जब हम तुम्हारा नाम लें, तभी देव हमारे यज्ञ को स्वीकार करें. (५) तं नो द्यावापृथिवी तन्न आप इन्द्रः शृण्वन्तु मरुतो हवं वचः. मा शूने भूम सूर्यस्य सन्दृशि भद्रं जीवन्तो जरणामशीमहि.. (६) द्यावा-पृथिवी, इंद्र, जल एवं मरुत् हमारा आह्वान एवं स्तुतिवचन सुनें. हम सूर्य की कृपादृष्टि पाकर दुःख प्राप्त न करें, अपितु चिरकाल तक प्राण धारण करते हुए कल्याण एवं यौवन का भोग करें. (६) विश्वाहा त्वा सुमनसः सुचक्षसः प्रजावन्तो अनमीवा अनागसः. उद्यन्तं त्वा मित्रमहो दिवेदिवे ज्योग्जीवाः प्रति पश्येम सूर्य.. (७) हे सूर्य देव! हम प्रसन्नमन, सुदर्शन, संतानयुक्त, रोगरहित एवं निष्पाप होकर सदा तुम्हारा यज्ञ करें. हे मित्रों का आदर करने वाले सूर्य! हम चिरंजीवी बनकर तुम्हें प्रतिदिन उदित होता हुआ देखें. (७) महि ज्योतिर्बिभ्रतं त्वा विचक्षण भास्वन्तं चक्षुषेचक्षुषे मयः. आरोहन्तं बृहतः पाजसस्परि वयं जीवाः प्रति पश्येम सूर्य.. (८) हे विशेष दृष्टि वाले सूर्य! हम चिरंजीवी बनकर प्रतिदिन तुम्हारा दर्शन करें. तुम महान् ज्योति धारण करने वाले, दीप्तिशाली, सब देखने वालों की आंखों के लिए सुखकर एवं महान् सागर के ऊपर आरोहण करते हो. (८) यस्य ते विश्वा भुवनानि केतुना प्र चेरते नि च विशन्ते अक्तुभिः. अनागास्त्वेन हरिकेश सूर्याह्नाह्ना नो वस्यसावस्यसोदिहि.. (९) हे हरे बालों वाले सूर्य! तुम्हारी जिस पहचान के कारण सभी प्राणी विशेष रूप से गति करते हैं और रात के समय विश्राम करते हैं, तुम अपनी पहचान को लेकर प्रतिदिन उगो एवं ebook converter DEMO Watermarks*