ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1620, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्रेष्ठे स्याम सवितुः सवीमनि तद्देवानांमवो अद्या वृणीमहे.. (१२) हम महान् एवं प्रज्वलित अग्नि से सुख व मित्रवरुण से पापहीनता तथा कल्याण प्राप्त करें. हम सूर्य से सर्वोत्तम सुख प्राप्त करें. आज हमें देवों से उसी विशेष रक्षा की याचना करते हैं. (१२) ये सवितुः सत्यसवस्य विश्वे मित्रस्य व्रते वरुणस्य देवाः. ते सौभगं वीरवद्गोमदप्नो दधातन द्रविणं चित्रमस्मे.. (१३) जो देव सत्य स्वभाव वाले सविता, मित्र और वरुण के यज्ञ में उपस्थित रहते हैं, वे हमें सौभाग्य, संतान एवं गायों से युक्त अन्न, पूजनीय धन एवं पुण्यकर्म दें. (१३) सविता पश्चात्तात्सविता पुरस्तात्सवितोत्तरात्तात्सविताधरात्तात्. सविता नः सुवतु सर्वतातिं सविता नो रासतां दीर्घमायुः.. (१४) सूर्य देव हमें पश्चिम, पूर्व, उत्तर एवं दक्षिण दिशाओं में सभी अभिलषित धन प्रदान करें एवं दीर्घ आयु दें. (१४) सूक्त—३७ देवता—सूर्य नमो मित्रस्य वरुणस्य चक्षसे महो देवाय तदृतं सपर्यत. दूरेदृशे देवजाताय केतवे दिवस्पुत्राय सूर्याय शंसत.. (१) हे ऋत्विजो! तुम मित्र और वरुण को देखने वाले महान्, दीप्तिशाली, दूर रहते हुए भी सबको देखने वाले, देवों के वंश में उत्पन्न, संसार का ज्ञान कराने वाले एवं स्वर्ग के पुत्रतुल्य सूर्य को नमस्कार करके यज्ञ आदि से उनकी पूजा तथा प्रशंसा करो. (१) सा मा सत्योक्तिः परि पातु विश्वतो द्यावा च यत्र ततनन्नहानि च. विश्वमन्यन्नि विशते यदेजति विश्वाहापो विश्वाहोदेति सूर्यः.. (२) ये सत्यवचन मेरी सभी प्रकार से रक्षा करें, जिनके सहारे आकाश एवं दिन स्थित हैं, सभी प्राणी जिनके आश्रित हैं, जिनके प्रभाव से प्राणिसमूह गति करता है, जल बहता है एवं सदा सूर्य उगता है. (२) न ते अदेवः प्रदिवो नि वासते यदेतशेभिः पतरै रथर्यसि. प्राचीनमन्यदनु वर्तते रज उदन्येन ज्योतिषा यासि सूर्य.. (३) हे सूर्य देव! जब तुम अपने गतिशील घोड़ों को रथ में जोड़ने की इच्छा करते हो, तब कोई भी प्राचीन राक्षस तुम्हारे समीप नहीं रहता. तुम्हारी वह प्रसिद्ध ज्योति जल के पीछे चलती है, जिसके साथ तुम उदित होते हो. (३) ebook converter DEMO Watermarks*