भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 163

वीळु चिदारुजत्नुभिर्गुहा चिदिन्द्र वह्निभिः. अविन्द उस्रिया अनु.. (५) हे इंद्र! तुमने मरुद्गण के साथ मिलकर गुफा में छिपाई हुई गायों को खोजकर वहां से निकाला. वे मरुद्गण दृढ़ स्थान को भी भेदन करने एवं एक स्थान की वस्तु को दूसरी जगह में ले जाने में समर्थ हैं. (५) देवयन्तो यथा मतिमच्छा विदद्वसुं गिरः. महामनूषत श्रुतम्.. (६) स्तुति करने वाले लोग स्वयं देवभाव प्राप्त करने की इच्छा से धन के स्वामी, शक्तिशाली एवं विख्यात मरुद्गण को लक्ष्य करके उसी प्रकार स्तुति कर रहे हैं, जिस प्रकार वे इंद्र की स्तुति करते हैं. (६) इन्द्रेण सं हि दृक्षसे सञ्जग्मानो अबिभ्युषा. मन्दू समानवर्चसा.. (७) हे मरुद्गण! भयरहित इंद्र के साथ तुम्हारी बहुत घनिष्ठता देखी जाती है. तुम दोनों नित्य प्रसन्न और समान तेज वाले हो. (७) अनवद्यैरभिद्युभिर्मखः सहस्वदर्चति. गणैरिन्द्रस्य काम्यैः.. (८) यह यज्ञ दोषरहित, देवलोक में निवास करने वाले तथा फल देने के कारण कामना करने योग्य मरुद्गण के साथ होने के कारण इंद्र को बलवान् समझकर पूजा-अर्चना करता है. (८) अतः परिज्मन्ना गहि दिवो वा रोचनादधि. समस्मिन्नृञ्जते गिरः.. (९) हे चारों ओर व्यापक मरुद्गण! तुम द्युलोक, आकाश या दीप्त सूर्य मंडल से इस यज्ञ में आओ. पुरोहित-समूह इस यज्ञ में तुम्हारी भली प्रकार स्तुति कर रहा है. (९) इतो वा सातिमीमहे दिवो वा पार्थिवादधि. इन्द्रं महो वा रजसः.. (१०) हम इंद्र देव की प्रार्थना इसीलिए करते हैं कि वे पृथ्वीलोक, आकाश या वायुलोक से हमें धन प्रदान करते हैं. (१०) सूक्त—७ देवता—इंद्र इन्द्रमिद् गाथिनो बृहदिन्द्रमर्केभिरर्किणः. इन्द्रं वाणीरनूषत.. (१) सामवेद का गान करने वालों ने सामगान के द्वारा, ऋग्वेद का पाठ करने वालों ने ऋचाओं द्वारा और यजुर्वेद का पाठ करने वालों ने मंत्रों द्वारा इंद्र की स्तुति की है. (१) इन्द्र इद्धर्योः सचा सम्मिश्ल आ वचोयुजा. इन्द्रो वज्री हिरण्ययः.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*

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