ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 164, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंवज्र धारण करने वाले एवं सर्वाभरणभूषित इंद्र अपने आज्ञाकारी दोनों घोड़ों को अत्यंत शीघ्र रथ में जोतकर सबके साथ मिल जाते हैं. (२) इन्द्रो दीर्घाय चक्षस आ सूर्यं रोहयद् दिवि. वि गोभिरद्रिमैरयत्.. (३) इंद्र ने मनुष्यों को निरंतर देखने के लिए सूर्य को आकाश में स्थापित किया है. सूर्य अपनी किरणों द्वारा पर्वत आदि समस्त संसार को प्रकाशित कर रहे हैं. (३) इन्द्र वाजेषु नोऽव सहस्रप्रधनेषु च. उग्र उग्राभिरूतिभिः.. (४) हे शत्रुओं द्वारा न हारने वाले इंद्र! अपनी अमोघ रक्षण शक्ति के द्वारा ऐसे महायुद्धों में हमारी रक्षा करो जो हजारों गजों, अश्वों आदि का लाभ देने वाले हों. (४) इन्द्रं वयं महाधन इन्द्रमर्भे हवामहे. युजं वृत्रेषु वज्रिणम्.. (५) इंद्र हमारी सहायता करने वाले तथा धन-लाभ का विरोध करने वाले हमारे शत्रुओं के लिए वज्रधारी हैं. हम स्वल्प अथवा विपुल धन पाने के लिए हम इंद्र का आह्वान करते हैं. (५) स नो वृषन्नमुं चरुं सत्रादावन्नपा वृधि. अस्मभ्यमप्रतिष्कुतः.. (६) हे इंद्र! तुम हमारे लिए इच्छित फल देने वाले तथा वृष्टि प्रदान करने वाले हो. तुम हमारे लाभ के लिए उस मेघ का मर्दन करो. तुमने कभी भी हमारी प्रार्थना अस्वीकार नहीं की है. (६) तुञ्जेतुञ्जे य उत्तरे स्तोमा इन्द्रस्य वज्रिणः. न विन्धे अस्य सुष्टुतिम्.. (७) भिन्न-भिन्न फल देने वाले देवताओं के लिए जिन उत्तम स्तुतियों का प्रयोग किया जाता है, वे सब वज्र धारण करने वाले इंद्र के लिए हैं. इंद्र के अनुरूप स्तुति को मैं नहीं जानता. (७) वृषा यूथेव वंशगः कृष्टीरियर्त्योजसा. ईशानो अप्रतिष्कुतः.. (८) जिस प्रकार तेज चाल वाला बैल धेनु समूह को अपने बल से अनुगृहीत करता है, उसी प्रकार इच्छाओं को पूरा करने वाले इंद्र मनुष्यों को शक्तिशाली बनाते हैं. इंद्र समर्थ हैं एवं किसी की प्रार्थना को ठुकराते नहीं हैं. (८) य एकश्चर्षणीनां वसूनामिरज्यति. इन्द्रः पञ्च क्षितीनाम्.. (९) इंद्र समस्त मानवों, संपत्तियों और पंच-क्षितियों पर निवास करने वाले वर्णों पर शासन करने वाले हैं. (९) इन्द्रं वो विश्वतस्परि हवामहे जनेभ्यः. अस्माकमस्तु केवलः.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*