ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1636, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंकरते हैं. (४) श्रीणामुदारो धरुणो रयीणां मनीषाणां प्रार्पणः सोमगोपाः. वसुः सूनुः सहसो अप्सु राजा वि भात्यग्र उषसामिधानः.. (५) अग्नि विभूतियों के दाता, धनों के धारणकर्त्ता, मनचाही वस्तुएं देने वाले, सोमरस के रक्षक, सबको बसाने वाले, शक्ति के पुत्र, जलों में स्थित एवं सबके स्वामी हैं. प्रातःकाल के प्रारंभ में प्रज्वलित अग्नि विशेष शोभा धारण करते हैं. (५) विश्वस्य केतुर्भुवनस्य गर्भ आ रोदसी अपृणाज्जायमानः. वीळं चिदद्रिमभिनत्परायञ्जना यदग्निमयजन्त पञ्च.. (६) विश्व का ज्ञान कराने वाले व जल के गर्भ रूप अग्नि उत्पन्न होते ही धरती-आकाश को घेर लेते हैं. जब मनुष्यों की पांचों जातियां अग्नि का यज्ञ करती हैं, तब जाते हुए दृढ़ मेघ को भी भेद देती हैं. (६) उशिक्पावको अरतिः सुमेधा मर्तेष्वग्निरमृतो नि धायि. इयर्ति धूममरुषं भरिभ्रदुच्छुक्रेण शोचिषा द्यामिनक्षन्.. (७) हवि चाटने वाले, समस्त लोकों को शुद्ध करने वाले, सब ओर गतिशील, शोभन प्रज्ञा वाले व मरणरहित अग्नि मरणधर्मा मानवों में रहते हैं. अग्नि धूम को प्रेरित करते हैं एवं तेजस्वी रूप धारण करते हुए, उज्ज्वल किरणों से स्वर्ग को व्याप्त करते हैं. (७) दृशानो रुक्म उर्विया व्यद्यौद्दुर्मर्षमायुः श्रिये रुचानः. अग्निरमृतो अभवद्योभिर्यदेनं द्यौर्जनयत्सुरेताः.. (८) देखने में तेजस्वी अग्नि अत्यंत प्रकाशित होते हैं. सभी जगह जाने वाले अग्नि शोभा के लिए दुर्धर्ष रूप से चमकते हैं. वे अन्नों और वनस्पतियों से अमर बने हैं. अग्नि को शोभन वीर्य वाले आदित्य ने जन्म दिया है. (८) यस्ते अद्य कृणवद्भद्रशोचेऽपूपं देव घृतवन्तमग्ने. प्र तं नय प्रतरं वस्यो अच्छाभि सुम्नं देवभक्तं यविष्ठ.. (९) हे कल्याणकारक दीप्ति वाले, दीप्तिशाली एवं अतिशय युवा अग्नि! तुम्हारे लिए आज जिस यजमान ने घी वाला पुआ बनाया है, उस उत्तम व्यक्ति को तुम धन की ओर ले जाओ एवं उस देवसेवक यजमान को सुख दो. (९) आ तं भज सौश्रवसेष्वग्न उक्थउक्थ आ भज शस्यमाने. प्रियः सूर्ये प्रियो अग्ना भवात्युज्जातेन भिनददुज्जन्वित्वैः.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*