ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1661, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयजमान की उंगलियां पकड़कर एवं चरु पकाते हुए तुम्हारा नाम लेता है. (३) कृष्णा यद्गोष्वरुणीषु सीदद्दिवो नपाताश्विना हुवे वाम्. वीतं मे यज्ञमा गतं मे अन्नं ववन्वांसा नेषमस्मृतधू.. (४) हे स्वर्गपुत्र अश्विनीकुमारो! जिस समय काली रात लाल रंग वाली उषाओं में बदलने लगती है, उस समय मैं तुम्हारा आह्वान करता हूं. मेरे हव्य अन्न की अभिलाषा करने के लिए तुम मेरे यज्ञ में आओ. अश्वों के समान उसे ग्रहण करो और मेरे प्रति द्रोह को भुला दो. (४) प्रथिष्ट यस्य वीरकर्ममिष्णदनुष्ठितं नु नर्यो अपौहत्. पुनस्तदा वृहति यत्कनाया दुहितुरा अनुभृतमनर्वा.. (५) प्रजापति का पुत्र उत्पन्न करने में समर्थ वीर्य सर्वोत्तम है. प्रजापति ने अपने उस मानव- हितकारी वीर्य का त्याग किया, जिसे उन्होंने अपनी सुंदर उषा के शरीर में सिंचित किया था. (५) मध्या यत्कर्त्वमभवदभीके कामं कृण्वाने पितरि युवत्याम्. मनानग्रेतो जहतुर्वियन्ता सानौ निषिक्तं सुकृतस्य योनौ.. (६) जिस समय पिता ने अपनी युवती कन्या के साथ यथेच्छ कर्म किया, उस समय उनके संभोग कर्म के समीप ही थोड़ा वीर्य गिरा. परस्पर अभिगमन करते हुए उन दोनों ने वह वीर्य यज्ञ के ऊंचे स्थान योनि में छोड़ा था. (६) पिता यत्स्वां दुहितरमधिष्कन्क्ष्मया रेतः सज्जमानो नि षिञ्चत्. स्वाध्योऽजनयन्ब्रह्म देवा वास्तोष्पतिं व्रतपां निरतक्षन्.. (७) जिस समय पिता ने अपनी पुत्री के साथ संभोग किया उस समय धरती से मिलकर वीर्य त्याग किया. शोभन कर्म वाले देवों ने उसी वीर्य से व्रतरक्षक देव वास्तोष्पति का उत्पादन किया. (७) स ईं वृषा न फेनमस्यदाजौ स्मदा परैदप दभ्रचेताः. सरत्पदा न दक्षिणा परावृङ् न ता नु मे पृश्नयो जगृभ्रे.. (८) इंद्र ने नमुचि का वध करने के लिए संग्राम में जिस प्रकार फेन फेंका, उसी प्रकार वास्तोष्पति हमसे दूर जा रहे हैं. अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने दक्षिणा के रूप में हमें जो गाएं दी थीं, उन्हें अल्पमन वाले वास्तोष्पति ने स्वीकार नहीं किया, जबकि वे उन्हें ग्रहण करने में समर्थ थे. (८) मक्षू न वह्निः प्रजाया उपब्दिरग्निं न नग्न उप सीददूधः. सनितेध्मं सनितोत वाजं स धर्ता जज्ञे सहसा यवीयूत्.. (९) ebook converter DEMO Watermarks*