ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1662, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रजाओं को कष्ट पहुंचाने वाले और अग्नि के समान प्रजाओं को जलाने वाले राक्षस यज्ञ में शीघ्र नहीं आते. नंगे रहनेवाले राक्षस आदि रात में यज्ञ की अग्नि के पास नहीं आते. राक्षसों से युद्ध करने वाले एवं यज्ञ के धारक अग्नि काष्ठों और अन्न को स्वीकार करते हुए बलपूर्वक उत्पन्न हुए. (९) मक्षू कनायाः सख्यं नवग्वा ऋतं वदन्त ऋतुयुक्तिमग्मन्. द्विबर्हसो य उप गोपमागुरदक्षिणासो अच्युता दुदुक्षन्.. (१०) नौ मास के अनुष्ठान के द्वारा गाएं प्राप्त करने वाले अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने सत्य भाषण करते हुए एवं कमनीय स्तुतियां बोलते हुए यज्ञ समाप्त किया. वे इहलोक और परलोक में उन्नत होकर इंद्र के समीप पहुंचे एवं उन्होंने दक्षिणारहित यज्ञ करके अविनाशी फल प्राप्त किया. (१०) मक्षू कनायाः सख्यं नवीयो राधो न रेत ऋतमित्तुरण्यन्. शुचि यत्ते रेक्ण आयजन्त सबर्दुघायाः पय उस्रियायाः.. (११) हे इंद्र! अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने कमनीय गायों की मित्रता शीघ्र प्राप्त करके अमृततुल्य दूध देने वाली गाय का दूध यज्ञ में होम किया. उस समय नई संपत्ति के समान सिंचित करने वाला जल प्राप्त किया. (११) पश्चा यत्पश्चा वियुता बुधन्तेति ब्रवीति वक्तरी रराणः. वसोर्वसुत्वा कारवोऽनेहा विश्वं विवेष्टि द्रविणमुप क्षु.. (१२) स्तोता इस प्रकार कहते हैं कि इंद्र अपने स्तोता से बहुत अधिक प्रेम करते हैं. स्तोता पणियों द्वारा चुराई गई अपनी गायों को जान पावें, उससे पहले ही वे गायों को खोजकर ले आते हैं. (१२) तदिन्वस्य परिषद्दानो अग्मन्पुरू सदन्तो नार्षदं बिभित्सन्. वि शुष्णस्य संग्रथितमनर्वा विदत्पुरुप्रजातस्य गुहा यत्.. (१३) इंद्र के चारों ओर वर्तमान सेविका रश्मियां प्रकाश देने के लिए जाती हैं. इन परम शक्तिशाली इंद्रानुचरों ने नृषदपुत्र शुष्ण को नष्ट करने की इच्छा की. इंद्र अनेक प्रकार से प्रादुर्भूत शुष्ण का मर्म जानते हैं. उसका जो मर्म गुहा में छिपा है, उसे भी जानते हैं. (१३) भर्गो ह नामोत यस्य देवाः स्वर्ष्ण ये त्रिषधस्थे निषेदुः. अग्निर्ह नामोत जातवेदाः शृधी नो होतर्ऋतस्य होताध्रुक्.. (१४) जिस अग्नि संबंधी तेज के समीप कुशों पर देवगण स्वर्ग के समान बैठते हैं, अग्नि के उस तेज का नाम भर्ग है. अग्नि के तेज का नाम जातवेदा है. हे होम संपन्न करने वाले अग्नि! तुम्हीं यज्ञ संबंधी देवों को बुलाने वाले हो. तुम द्रोहरहित होकर हमारी पुकार सुनो. (१४) ebook converter DEMO Watermarks*