ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1703, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंवे हमारे सभी हवनों को स्वीकार करें एवं हमारी रक्षा के लिए सबके सुखोत्पादक एवं भले काम करने वाले बनें. (७) सूक्त—८२ देवता—विश्वकर्मा चक्षुषः पिता मनसा हि धीरो घृतमेने अजनन्नम्नमाने. यदेदन्ता अददृहन्त पूर्व आदिद् द्यावापृथिवी अप्रथेताम्.. (१) शरीर को उत्पन्न करने वाले, स्वयं को अद्वितीय समझने वाले एवं धीर विश्वकर्मा ने सबसे पहले जल को उत्पन्न किया. इसके पश्चात् जल में इधर उधर चलने वाले द्यावा-पृथिवी का निर्माण किया. विश्वकर्मा ने द्यावा-पृथिवी के प्राचीन एवं अंतिम भागों को दृढ़ करके प्रसिद्ध किया. (१) विश्वकर्मा विमना आद्विहाया धाता विधाता परमोत संदृक्. तेषामिष्टानि समिषा मदन्ति यत्रा सप्तऋषीन्यर एकमाहुः.. (२) विशाल मन वाले विश्वकर्मा स्वयं महान् हैं. वे सृष्टि का निर्माण करने वाले वृष्टिकर्त्ता, श्रेष्ठ एवं सब कुछ देखने वाले हैं. विद्वान् लोग कहते हैं कि सप्तर्षियों से भी ऊंचे स्थानों को वे अकेले ही देखते हैं. उन सप्तर्षियों की अभिलाषाएं हव्यान्न द्वारा पूर्ण होती हैं. (२) यो नः पिता जनिता यो विधाता धामानि वेद भुवनानि विश्वा. यो देवानां नामधा एक एव तं सम्प्रश्नं भुवना यन्त्यन्या.. (३) जो विश्वकर्मा हमारा पालन करने वाले, उत्पन्न करने वाले व विश्व के उत्पादक हैं तथा देवों के तेज एवं सभी भुवनों को जानते हैं. जो एकमात्र देवों का नाम रखने वाले हैं, सब प्राणी उन्हीं के विषय में जानना चाहते हैं. (३) त आयजन्त द्रविणं समस्मा ऋषयः पूर्वे जरितारो न भूना. असूर्ते सूर्ते रजसि निषत्ते ये भूतानि समकृण्वन्निमानि.. (४) जिन ऋषियों ने स्थावर और जंगमरूप विश्व का निर्माण हो जाने पर सभी प्राणियों को बनाया, उन्हीं ऋषियों ने प्राचीन स्तोताओं के समान धन व्यय करके यज्ञ किया. (४) परो दिवा पर एना पृथिव्या परो देवेभिरसुरैर्यदस्ति. कं स्विद्गर्भं प्रथमं दध्र आपो यत्र देवाः समपश्यन्त विश्वे.. (५) वह ईश्वर द्युलोक, धरती, देवों व असुरों से महान् हैं. जलों ने वह कौन सा गर्भ धारण किया था, जहां सभी देवों ने स्वयं को परस्पर मिला हुआ देखा. (५) तमिद्गर्भं प्रथमं दध्र आपो यत्र देवाः समगच्छन्त विश्वे.