ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1704, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअजस्य नाभावध्येकमर्पितं यस्मिन्विश्वानि भुवनानि तस्थुः.. (६) जल ने उन्हीं विश्वकर्मा को गर्भ में धारण किया था. वहीं सब देव एक-दूसरे से मिले. उस जन्मरहित की नाभि में ब्रह्मांड स्थित है. उसीमें सारा संसार स्थित है. (६) न तं विदाथ य इमा जजानान्यद्युष्माकमन्तरं बभूव. नीहारेण प्रावृता जल्प्या चासुतृप उक्थशासश्चरन्ति.. (७) जिस विश्वकर्मा ने उन सब प्राणियों को उत्पन्न किया था, उसे तुम नहीं जानते. तुम्हारा हृदय उसे जानने की योग्यता नहीं रखता. लोग अज्ञान रूपी पाले से ढक कर तरह-तरह की बातें करते हैं. वे भोजन करते हुए भांति-भांति की स्तुतियां करते हैं और स्वर्ग में जाने का प्रयत्न करते हैं. (७) सूक्त—८३ देवता—मन्यु यस्ते मन्योऽविधद्वज्र सायक सह ओजः पुष्यति विश्वमानुषक्. साह्याम दासमार्यं त्वया युजा सहस्कृतेन सहसा सहस्वता.. (१) हे वज्र के समान सारपूर्ण एवं बाण के समान शत्रुनाशक मन्यु! जो यजमान तुम्हारी पूजा करता है, वह ओज एवं बल धारण करता है एवं संग्राम में सभी शत्रुओं को जीतता है. तुम्हारी सहायता से हम दास और आर्य दो प्रकार के शत्रुओं को हरावें, तुम शक्ति के उत्पादक एवं शक्तिशाली हो. (१) मन्युरिन्द्रो मन्युरेवास देवो मन्युर्होता वरुणो जातवेदाः. मन्युं विश ईळते मानुषीर्याः पाहि नो मन्यो तपसा सजोषाः.. (२) मन्यु इंद्र है. मन्यु ही देव है. मन्यु वरुण, होता और जातवेद अग्नि हैं. सभी मानव प्रजाएं मन्यु की स्तुति करती हैं. हे मन्यु! तुम हमारे पिता तप के साथ मिलकर हमारी रक्षा करो. (२) अभीहि मन्यो तवसस्तवीयान्तपसा युजा वि जहि शत्रून्. अमित्रहा वृत्रहा दस्युहा च विश्वा वसून्या भरा त्वं नः.. (३) हे अतिशय शक्तिशाली मन्यु! तुम हमारे यज्ञ में आओ. तुम मेरे पिता तप से मिलकर शत्रुओं को मारो. हे शत्रुनाशक वृत्रवधकर्त्ता एवं राक्षसों को मारने वाले मन्यु! तुम सब प्रकार का धन हमारे लिए लाओ. (३) त्वं हि मन्यो अभिभूत्योजाः स्वयम्भूर्भामो अभिमातिषाहः. विश्वचर्षणिः सहुरिः सहावानस्मास्वोजः पृतनासु धेहि.. (४) हे मन्यु! तुम शत्रुओं को हराने वाली शक्ति से संपन्न स्वयं ही उत्पन्न क्रुद्ध ebook converter DEMO Watermarks*