भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1727

प्राक्तुभ्य इन्द्रः प्र वृधो अहभ्यः प्रान्तरिक्षात्प्र समुद्रस्य धासेः. प्र वातस्य प्रथसः प्र ज्मो अन्तात्प्र सिन्धुभ्यो रिरिचे प्र क्षितिभ्यः.. (११) इंद्र रात, दिन, अंतरिक्ष, जल धारण करने वाले समुद्र विस्तृत वायु, धरती की सीमांत नदियों एवं मानवों से बढ़कर हैं. (११) प्र शोशुचत्या उषसो न केतुरसिन्वा ते वर्ततामिन्द्र हेतिः. अश्मेव विध्य दिव आ सृजानस्तपिष्ठेन हेषसा द्रोघमित्रान्.. (१२) हे इंद्र! तुम्हारा न टूटने वाला आयुध वज्र ज्योति वाली उषा की किरणों के साथ शत्रुओं पर गिरे. जैसे आकाश से गिरने वाली बिजली वृक्षों को नष्ट करती है, उसी प्रकार तुम द्रोह करने वाले अमित्रों को अत्यंत तप्त और गर्जन करने वाले आयुधों से मारो. (१२) अन्वह मासा अन्विद्वनान्यन्वोषधीरनु पर्वतासः. अन्विन्द्रं रोदसी वावशाने अन्वापो अजिहत जायमानम्.. (१३) जैसे ही इंद्र का जन्म हुआ, वैसे ही मास, वन, ओषधियां, पर्वत, एक-दूसरे को चाहने वाले द्यावा-पृथिवी एवं जल उनके पीछे चलने लगे. (१३) कर्हि स्वित्सा त इन्द्र चेत्यासदघस्य यद्विनदो रक्ष एषत्. मित्रक्रुवो यच्छसने न गावः पृथिव्या आपृगमुया शयन्ते.. (१४) हे इंद्र! तुमने जिस तलवार को फेंककर पापी राक्षसों का छेदन किया था, वह कब फेंकी जाएगी? जिस प्रकार वधशाला में गाएं कटती हैं, उसी प्रकार तुम्हारे इस आयुध से चोट खाकर मित्रों से द्वेष करने वाले राक्षस धरती पर गिरते हैं और सो जाते हैं. (१४) शत्रूयन्तो अभि ये नस्ततस्रे महि व्राधन्त ओगणास इन्द्र. अन्धेनामित्रस्तमसा सचन्तां सुज्योतिषो अक्तवस्ताँ अभि ष्युः.. (१५) हे इंद्र! जिन राक्षसों ने हमारे प्रति शत्रुभाव रखकर हमें बाधा पहुंचाई है एवं एकत्र होकर जिन्होंने हमें घेर लिया है, वे गहरे अंधकार में डूब जावें. उनके लिए ज्योति वाली रात भी अंधेरी हो जाए. (१५) पुरूणि हि त्वा सवना जनानां ब्रह्माणि मन्दन्गृणतामृषीणाम्. इमामाघोषन्नवसा सहूतिं तिरो विश्वाँ अर्चतो याह्यर्वाङ्.. (१६) हे इंद्र! यजमानों के बहुत से यज्ञ एवं स्तुति करते हुए ऋषियों की स्तुतियां तुम्हें प्रसन्न करती हैं. तुम इस स्तुति को शोभायुक्त बताते हुए अन्य सब स्तुतिकर्त्ताओं का तिरस्कार करो एवं रक्षासाधनों के साथ मेरे सामने स्थित होओ. (१६) ebook converter DEMO Watermarks*