ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1728, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंएवा ते वयमिन्द्र भुञ्जतीनां विद्याम सुमतीनां नवानाम्. विद्याम वस्तोरवसा गृणन्तो विश्वामित्रा उत त इन्द्र नूनम्.. (१७) हे इंद्र! हम रक्षा करने वाले एवं तुमसे संबंधित नए-नए स्तोत्र प्राप्त करें. हम विश्वामित्र की संतान अपनी रक्षा के लिए तुम्हारी स्तुति करते हुए नाना प्रकार की संपत्ति प्राप्त करें. (१७) शुनं हुवेम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातौ. शृण्वन्तमुग्रमूतये समत्सु घ्नन्तं वृत्राणि संज्जितं धनानाम्.. (१८) हम इस युद्ध में विशाल शरीर वाले, संपत्तिशाली, पुकार सुनने वाले, उग्र संग्रामों में शत्रुओं को मारने वाले एवं शत्रुजनों को भली प्रकार जीतने वाले इंद्र को अन्नप्राप्ति और रक्षा के लिए बुलाते हैं. (१८) सूक्त—९० देवता—पुरुष सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्. स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्.. (१) विराट् पुरुष के हजार शीर्ष, हजार आंखें और हजार चरण हैं. वह धरती को चारों ओर से घेरकर उससे दस अंगुल अधिक स्थित हैं. (१) पुरुष एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्. उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति.. (२) जो कुछ हो चुका है अथवा होने वाला है, वह सब विराट् पुरुष ही है. वह अमृत का स्वामी है, क्योंकि वह कारण अवस्था छोड़कर जगत् अवस्था को धारण करता है. इस प्रकार प्राणी उसको भोगते हैं. (२) एतावानस्य महिमातो ज्यायाँश्च पूरुषः. पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि.. (३) यह सारा ब्रह्मांड विराट् पुरुष की महिमा है. वे स्वयं इससे बड़े हैं. सभी प्राणी उनके चौथाई अंश हैं. इनके तीन मरणरहित अंश दिव्यलोक में रहते हैं. (३) त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादोऽस्येहाभवत्पुनः. ततो विष्वङ् व्यक्रामत्साशनानशने अभि.. (४) तीन चरणों वाले विराट् पुरुष ऊपर उठे. उनका केवल एक चरण यहां स्थित रहा. इसके पश्चात् वे भोजन करने वाली एवं भोजन न करने वाली वस्तुओं के रूप में व्याप्त हुए. (४) ebook converter DEMO Watermarks*