ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1753, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंस रुद्रेभिरशस्तवार ऋभ्वा हित्वी गयमारॆअवद्य आगात्. वम्रस्य मन्ये मिथुना विवव्री अन्नमभीत्यारोदयन्मुषायन्.. (५) स्तोताओं के बिना मांगे ही धन देने वाले एवं महान् इंद्र मरुतों के साथ अपना स्थान छोड़ कर आवें. मैं समझता हूं कि मुझ वम्र ऋषि के माता-पिता रोगरहित हो गए हैं. मैं शत्रुओं का धन छीनकर उन्हें रुलाता हूं. (५) स इद्वासं तुवीरवं पतिर्दन्-ष्ळक्षं त्रिशीर्षाणं दमन्यत्. अस्य त्रितो न्वोजसा वृधानो विपा वराहमयोअग्रया हन्.. (६) स्वामी इंद्र ने हल्ला मचाने वाले दासों का दमन किया था तथा तीन सिर वाले एवं छः आंखों वाले विश्वरूप को मारा था. त्रित ने इंद्र की शक्ति से बढ़कर लोहे के समान उंगलियों से वराह का नाश किया था. (६) स द्रुह्वणे मनुष ऊर्ध्वसान आ साविषदर्शसानाय शरुम्. स नृतमो नहुषोऽस्मत्सुजातः पुरोऽभिनदर्हन्दस्युहत्ये.. (७) इंद्र शत्रुओं द्वारा युद्ध के लिए ललकारे गए अपने भक्त को शौर्य आदि गुणों से युक्त करके शत्रुनाश में समर्थ बना देते हैं एवं उसे मारने के लिए शस्त्र प्रदान करते हैं. मनुष्यों के सर्वश्रेष्ठ नेता एवं हमारे लिए उत्पन्न इंद्र पूज्य बनकर युद्ध में शत्रुनगरियों को भेदते हैं. (७) सो अभ्रियो न यवस उदन्यन्क्षयाय गातुं विद्नन्नो अस्मे. उप यत्सीददिन्दुं शरीरैः श्येनोऽयोपाष्टिर्हन्ति दस्यून्.. (८) वे इंद्र मेघ समूह के समान घास पैदा होने के लिए जल गिराना चाहते हैं तथा हमारे निवासस्थान के लिए हमें मार्ग बताते हैं. वे जब अपने शरीर के सभी अंगों से सोम प्राप्त करते हैं, तब बाज पक्षी के समान लोहमय पीठ वाले बनकर शत्रुओं को मारते हैं (८) स व्राधतः शवसानेभिरस्य कुत्साय शुष्णं कृपणे परादात्. अयं कविमनयच्छस्यमानमत्कं यो अस्य सनितोत नृणाम्.. (९) इंद्र महान् शत्रुओं को आयुधों द्वारा भगा देते हैं. उन्होंने कुत्स के स्तोत्र के कारण शुष्ण असुर को मारा था. इंद्र ने स्तुति करने वाले उशना कवि के विरोधियों को वश में किया था. वे उशना एवं अन्य मानवों को दान देने वाले हैं. (९) अयं दशस्यन्नर्योभिरस्य दस्मो देवेभिर्वरुणो न मायी. अयं कनीन ऋतुपा अवेद्यामिमीतारुं यश्चतुष्पात्.. (१०) इंद्र ने स्तोताओं को धन देने की इच्छा से मरुतों के साथ धन भेजा. इंद्र अपने तेज के कारण वरुण के समान शक्तिशाली हैं. सुंदर इंद्र समय पर रक्षा करने वाले जाने जाते हैं. ebook converter DEMO Watermarks*