ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1760, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयेन जिगाय शतवत्सहस्रं गवां मुद्गलः पृतनाज्येषु.. (९) बैल का साथ देने वाले एवं युद्ध की सीमा में पड़े हुए द्रुघण को देखो. मुद्गल ने द्रुघण की सहायता से युद्ध में सैकड़ों-हजारों गायों को जीता. (९) आरे अघा को न्वित्था ददर्श यं युञ्जन्ति तंम्वा स्थापयन्ति. नास्मै तृणं नोदकमा भरन्त्युत्तरो धुरो वहति प्रदेशित्.. (१०) किसी ने पास या दूर के स्थान में ऐसा देखा है कि जिसको रथों में जोतते हैं, उसीको ऊपर स्थापित करते हैं. इसे जल एवं घास नहीं दी जाती. यह धुरा धारण करता है एवं स्वामी को विजयी बनाता है. (१०) परिवृक्तेव पतिविद्यमानट् पीप्याना कूचक्रेणेव सिञ्चन्. एषैष्या चिद्रथ्या जयेम सुमङ्गलं सिनवदस्तु सातम्.. (११) मुद्गलानी ने परित्यक्ता स्त्री के समान शक्ति दिखाकर पति का धन प्राप्त किया. जिस प्रकार बादल धरती पर जल बरसाता है, उसी तरह मुद्गलानी ने बाण बरसाए. हम भी इसी प्रकार के सारथि द्वारा विजय प्राप्त करें. यह विजय हमें अन्न दे. (११) त्वं विश्वस्य जगतश्चक्षुरिन्द्रासि चक्षुषः. वृषा यदाजिं वृषणा सिषाससि चोदयन्वध्रिणा युजा.. (१२) हे इंद्र! तुम सारे संसार के नेत्र के समान हों. तुम नेत्र वालों के भी नेत्र हो. हे जलवर्षक इंद्र! तुम रस्सी द्वारा दो घोड़ों को रथ में बांधकर चलते हो एवं धन देते हो. (१२) सूक्त—१०३ देवता—इंद्र आशुः शिशानो वृषभो न भीमो घनाघनः क्षोभणश्चर्षणीनाम्. सङ्क्रन्दनोऽनिमिष एकवीरः शतं सेना अजयत्साकमिन्द्रः.. (१) इंद्र व्यापक शत्रुनाशक बैल के समान भयानक शत्रुघातक एवं मानवों को क्षुब्ध करने वाले हैं. वे शत्रुओं को रुलाने वाले व निमेषरहित चक्षु वाले हैं. उन्होंने अकेले ही सैकड़ों सेनाओं को जीता है. (१) सङ्क्रन्दनेनानिमिषेण जिष्णुना युत्कारेण दुश्च्यवनेन धृष्णुना. तदिन्द्रेण जयत तत्सहध्वं युधो नर इषुहस्तेन वृष्णा.. (२) हे योद्धा लोगो! शत्रुओं को रुलाने वाले, निमेषरहित युद्ध में जय पाने वाले युद्धकर्त्ता, अन्यों द्वारा विचलित न होने वाले, पराभवकारी, हाथ में बाण रखने वाले एवं जलवर्षक इंद्र की सहायता पाकर विजय पाओ एवं शत्रुओं के साथ युद्ध करो. (२) ebook converter DEMO Watermarks*