ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1761, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंस इषुहस्तैः स निषङ्गिभिर्वशी संस्रष्टा स युध इन्द्रो गणेन. संसृष्टजित्सोमपा बाहुशर्द्ध्यु१ग्रधन्वा प्रतिहिताभिरस्ता.. (३) सबको वश में करने वाले इंद्र हाथ में बाण धारण करने वाले तथा तूणीरधारी लोगों से युक्त होकर युद्ध करते हैं एवं शत्रुसमूह से भिड़ जाते हैं. युद्ध में भिड़ने वालों को जीतने वाले, सोमपानकर्त्ता, भुजबल युक्त एवं उद्यत धनुष वाले इंद्र अपने बाणों से शत्रुओं का नाश करते हैं. (३) बृहस्पते परि दीया रथेन रक्षोहामित्राँ अपबाधमानः. प्रभञ्जन्त्सेनाः प्रमृणो युधा जयन्नस्माकमेध्यविता रथानाम्.. (४) हे राक्षसहंता बृहस्पति! तुम शत्रुओं को जीतते हुए रथ पर बैठकर हमारे पास आओ. तुम शत्रुसेनाओं का नाश करो, विपक्षी योद्धाओं को मारो एवं हमारे रथों की रक्षा करके वृद्धि पाओ. (४) बलविज्ञाय स्थविरः प्रवीरः सहस्वान्वाजी सहमान उग्रः. अभिवीरो अभिसत्वा सहोजा जैत्रमिन्द्र रथमा तिष्ठ गोवित्.. (५) हे सब प्राणियों का बल जानने वाले, महान् उत्तम वीर, सामर्थ्यशाली, शीघ्र गति वाले, शत्रुपराभवकारी, उग्र, शक्तिशाली वीर पुत्रों वाले, बल प्राप्तकर्त्ता एवं शक्ति से उत्पन्न गायों को प्राप्त करने वाले इंद्र! तुम विजय प्राप्त करने वाले रथ पर चढ़ो. (५) गोत्रभिदं गोविदं वज्रबाहुं जयन्तमज्म प्रमृणन्तमोजसा. इमं सजाता अनु वीरयध्वमिन्द्रं सखायो अनु सं रभध्वम्.. (६) हे एक साथ उत्पन्न योद्धाओं एवं मित्रो! तुम मेघभेदनकारी, जल प्राप्त करने वाले, हाथ में वज्रधारणकर्त्ता, जयशील व गतिशील शत्रुसेना को शक्ति से पराजित करने वाले इंद्र को आगे करके युद्ध करो एवं प्रसन्नता प्राप्त करो. (६) अभि गोत्राणि सहसा गाहमानोऽदयो वीरः शतमन्युरिन्द्रः. दुश्च्यवनः पृतनाषाळयुध्योऽस्माकं सेना अवतु प्र युत्सु.. (७) दयाहीन वीर अनेक यज्ञों के स्वामी, अन्यों द्वारा विचलित न होने वाले शत्रुसेना को हराने वाले दूसरों द्वारा प्रहार न करने योग्य एवं शक्ति द्वारा मेघों में प्रवेश करने वाले इंद्र युद्धों में हमारी सेनाओं की रक्षा करें. (७) इन्द्र आसां नेता बृहस्पतिर्दक्षिणा यज्ञः पुर एतु सोमः. देवसेनानामभिभञ्जतीनां जयन्तीनां मरुतो यन्त्वग्रम्.. (८) इंद्र इन सेनाओं के स्वामी हैं. बृहस्पति इनके दक्षिण भाग में एवं यज्ञोपयोगी सोम इनके ebook converter DEMO Watermarks*