ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1775, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअस्य होतुः प्रदिश्यृतस्य वाचि स्वाहाकृतं हविरदन्तु देवाः.. (११) अग्नि तुरंत उत्पन्न होते ही यज्ञ का निर्माण करने लगे एवं देवों के अग्रगामी दूत बने. यज्ञ संबंधी अग्नि के वचन में मंत्र पढ़े जावें, स्वाहा शब्द बोला जावे एवं देव इव्य का भक्षण करें. (११) सूक्त—१११ देवता—इंद्र मनीषिणः प्र भरध्वं मनीषां यथायथा मतयः सन्ति नृणाम्. इन्द्रं सत्यैरैरयामा कृतेभिः स हि वीरो गिर्वणस्युर्विदानः.. (१) हे स्तोताओ! ज्यों-ज्यों तुम्हारी बुद्धि का उदय हो, वैसे-वैसे ही तुम स्तुतियां पढ़ो. सत्यकर्मों के अनुष्ठान द्वारा हम इंद्र को बुलाते हैं. वीर इंद्र स्तुतियों को जानकर स्तोताओं को प्यार करते हैं. (१) ऋतस्य हि सदसो धीतिरद्यौत्सं गार्ष्टेयो वृषभो गोभिरानट्. उदतिष्ठत्तविषेणा रवेण महान्ति चित्सं विव्याचा रजांसि.. (२) जल के आधार आकाश को धारण करने वाले इंद्र प्रकाशित होते हैं. तुरंत जन्मा बछड़ा जिस प्रकार गाय से मिला रहता है, उसी प्रकार इंद्र सर्वत्र व्याप्त हैं. इंद्र महान् शब्द के साथ उत्पन्न होते हैं तथा विस्तृत जलों का निर्माण करते हैं. (२) इन्द्रः किल श्रुत्या अस्य वेद स हि जिष्णुः पथिकृत्सूर्याय. आन्मेनां कृण्वन्नच्युतो भुवद्गोः पतिर्दिवः सनजा अप्रतीतः.. (३) इंद्र ही इस स्तुति को सुनना जानते हैं. जयशील इंद्र ने सूर्य का मार्ग बनाया है. अच्युत इंद्र ने सेना को प्रकट किया है. इंद्र गायों और स्वर्ग के प्रति सनातन एवं विरोधहीन हैं. (३) इन्द्रो महा महतो अर्णवस्य व्रतामिनादङ्गिरोभिर्गृणानः. पुरूणि चिन्नि तताना रजांसि दाधार यो धरुणं सत्यताता.. (४) अंगिरागोत्रीय ऋषियों द्वारा प्रशंसित होकर इंद्र ने अपनी महिमा से विशाल मेघ का कार्य समाप्त किया था. उन्होंने अनेक जल बनाए तथा सत्यरूप स्वर्ग में बल संचार किया. (४) इन्द्रो दिवः प्रतिमानं पृथिव्या विश्वा वेद सवना हन्ति शुष्णम्. महीं चिद्द्यामातनोत्सूर्येण चास्कम्भ चित्कम्भनेन स्कभीयान्.. (५) द्यावा-पृथिवी के बराबर इंद्र सभी सोम यज्ञों को जानते एवं सबका संताप नष्ट करते हैं. उन्होंने सूर्य के द्वारा विस्तृत आकाश को प्रकाशित किया. अतिशय धारणकर्त्ता इंद्र ने खंभा ebook converter DEMO Watermarks*