ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1776, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंबनकर आकाश को धारण किया है. (५) वज्रेण हि वृत्रहा वृत्रमस्तरदेवस्य शूशुवानस्य मायाः. वि धृष्णो अत्र धृषता जघन्थाथाभवो मघवन्बाह्वोजाः.. (६) हे इंद्र! तुमने वज्र से वृत्र को मारा. यज्ञविरोधी कार्य करने वाले वृत्र की सारी मायाओं को भयानक वज्र से समाप्त किया. हे धनस्वामी इंद्र! इसके बाद तुम अधिक शक्तिशाली बने. (६) सचन्त यदुषसः सूर्येण चित्रामस्य केतवो रामविन्दन्. आ यन्नक्षत्रं ददृशे दिवो न पुनर्यतो नकिरद्धा नु वेद.. (७) जब उषाएं सूर्य से मिलीं, तब इसकी किरणों ने विचित्र शोभा प्राप्त की. आकाश में जब कोई नक्षत्र दिखाई नहीं दिया था, तब सूर्य की सर्वत्रगामी किरणों को कोई नहीं जान पाया. (७) दूरं किल प्रथमा जग्मुरासामिन्द्रस्य याः प्रसवे सस्रुरापः. क्व स्विद्रग्रं क्व बुध्न आसामापो मध्यं क्व वो नूनमन्तः.. (८) इंद्र की आज्ञा से पहली बार जो जल बहा था, वह बहुत दूर गया. उस जल का अग्रभाग एवं मस्तक कहां है? हे जलो! तुम्हारा मध्य भाग कहां है? (८) सृजः सिन्धूँरहिना जग्रसानाँ आदिदेताः प्र विविज्रे जवेन. मुमुक्षमाणा उत या मुमुग्धेऽधेदेता न रमन्ते नितिक्ताः.. (९) हे इंद्र! तुमने मेघ के द्वारा ग्रसित जल को छुड़ाकर वेग से बहाया. इंद्र ने जब जलों को मुक्त करने की इच्छा की, उस समय अत्यंत शुद्ध जल एक स्थान पर नहीं रहे. (९) सध्रीचीः सिन्धुमुशतीरिवायन्त्सनाज्जार आरितः पूर्विदासाम्. अस्तमा ते पार्थिवा वसून्यस्मे जग्मुः सूनृता इन्द्र पूर्वीः.. (१०) सारे जल मिलकर अभिलाषिणी नारी के समान सागर की ओर बढ़े. शत्रुनगरियों को नष्ट करने वाले एवं शत्रुओं को दुर्बल बनाने वाले इंद्र सभी जलों के स्वामी हैं. हे इंद्र! धरती पर स्थित प्राचीन यज्ञरूपी धन एवं प्रसन्नतादायक स्तुतियां तुम्हारे पास गईं. (१०) सूक्त—११२ देवता—इंद्र इन्द्र पिब प्रतिकामं सुतस्य प्रातः सावस्तव हि पूर्वपीतिः. हर्षस्व हन्तवे शूर शत्रूनुक्थेभिष्ठे वीर्या ३ प्र ब्रवाम.. (१)