भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1791, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1791

हे इंद्र! यजमान के जिस घर में तुम हव्यरूप अन्न से तृप्त होते हो, उस में सांसारिक एवं दिव्य धन स्थापित करते हो. तुम सबके निर्माणकर्त्ता द्यावा-पृथिवी को गतिशील रखते हो, इसलिए अनेक लौकिक व वैदिक कर्मों को प्राप्त करते हो. (७) इमा ब्रह्म बृहद्दिवो विवक्तीन्द्राय शूषमग्रियः स्वर्षाः. महो गोत्रस्य क्षयति स्वराजो दुरश्च विश्वा अवृणोदप स्वाः.. (८) बृहद्दिव नामक ऋषि सुखपूर्वक इंद्र के लिए इन मंत्रों को बोलते हैं. ऋषियों में प्रमुख एवं स्वर्ग प्राप्त कराने वाले इंद्र महान् एवं स्वयंप्रकाशित पर्वतों को अपने बल से हराते हैं तथा बल असुर द्वारा बंद सभी द्वार खोलते हैं. (८) एवा महान्बृहद्दिवो अथर्वावोचत्स्वां तन्व१मिन्द्रमेव. स्वसारो मातरिभ्वरीररिप्रा हिन्वन्ति च शवसा वर्धयन्ति च.. (९) अधिक गुणों वाले, अथर्वा के पुत्र बृहद्दिव ने अपनी विशाल स्तुति केवल इंद्र के प्रति ही निवेदित की है. पापरहित नदियां यज्ञों का साधन बनकर इंद्र को प्रसन्न करती हैं तथा अपनी शक्ति से उन्हें बढ़ाती हैं. (९) सूक्त—१२१ देवता—प्रजापति हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्. स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (१) परमात्मा से सबसे पहले प्रजापति उत्पन्न हुए. वे उत्पन्न होते ही सब जगत् के स्वामी बने. उन्होंने धरती एवं इस द्यौ को धारण किया. हम पुरोडाश आदि के द्वारा दिव्य प्रजापति की सेवा करें. (१) य आत्मदा बलदा यस्य विश्व उपासते प्रशिषं यस्य देवाः. यस्य छायामृतं यस्य मृत्युः कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (२) जो प्रजापति आत्माओं तथा बलों को देने वाले हैं, सभी विश्व के प्राणी जिनकी आज्ञा को शिरोधार्य करते हैं. मरण एवं अमरता जिनकी छाया है, हम उन्हीं दिव्य प्रजापति की पुरोडाश आदि से सेवा करते हैं. (२) यः प्राणतो निमिषतो महित्वैक इद्राजा जगतो बभूव. य ईशे अस्य द्विपदश्चतुष्पदः कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (३) जो अपने महत्त्व से सांस लेने वाले, पलक झपकाने वाले एवं गतिशील प्राणियों के एकमात्र राजा हुए हैं, जो दो पैरों वाले मानवों एवं चार पैरों वाले पशुओं के स्वामी हैं, उन्हीं ebook converter DEMO Watermarks*