भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1794, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1794

एवं अभीष्ट फल देते हैं. वे दान करने वाले को उत्तम बल देते हैं. (४) त्वं दूतः प्रथमो वरेण्यः स हूयमानो अमृताय मत्स्व. त्वां मर्जयन्मरुतो दाशुषो गृहे त्वां स्तोमेभिर्भृगवो वि रुरुचुः.. (५) हे अग्नि! तुम दूत, सर्वश्रेष्ठ एवं वरण करने योग्य हो. तुम बुलाए जाने पर अमरता देने के लिए प्रसन्न बनो. दाता के घर में मरुद्गण तुम्हें सुशोभित करते हैं एवं भृगुवंशी ऋषि स्तोत्रों द्वारा तुम्हें दीप्तिशाली बनाते हैं. (५) इषं दुहन्त्सुदुघां विश्वधायसं यज्ञप्रिये यजमानाय सुक्रतो. अग्ने घृतस्नुस्त्रिर्ऋतानि दीद्यद्वर्तिर्यज्ञं परियन्त्सुकतूयसे.. (६) हे शोभन कर्म वाले अग्नि! यज्ञ में संलग्न यजमान के लिए विश्व को तृप्त करने वाली और यथेष्ट दूध देने वाली गाय से यज्ञफल को दुहो. तुम घृत की आहुति पाकर तीनों लोकों को प्रकाशित करते हुए यज्ञशाला में सर्वत्र वर्तमान हो, गतिशील हो एवं शोभन यज्ञ के समान आचरण करते हो. (६) त्वामिदस्या उषसो व्युष्टिषु दूतं कृण्वाना अयजन्त मानुषाः. त्वां देवा महयाय्याय वावृधुराज्यमग्ने निमृजन्तो अध्वरे.. (७) मनुष्य प्रातःकाल होते ही तुम्हें दूत बनाकर यज्ञ करते हैं. हे अग्नि! देवगण यज्ञ में तुम्हें घृत के द्वारा प्रज्वलित करके पूजा के लिए बढ़ाते हैं. (७) नि त्वा वसिष्ठा अह्वन्त वाजिनं गृणन्तो अग्ने विदथेषु वेधसः. रायस्पोषं यजमानेषु धारय यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (८) हे अग्नि! वसिष्ठपुत्र यज्ञों में अनुष्ठान आरंभ करके तुम्हारी स्तुति करते हैं एवं अन्न प्रदान करते हैं. तुम यजमानों के घरों में अधिक अन्न रखो एवं कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (८) सूक्त—१२३ देवता—वेन अयं वेनश्चोदयत्पृश्निगर्भा ज्योतिर्जरायू रजसो विमाने. इममपां सङ्गमे सूर्यस्य शिशुं न विप्रा मतिभी रिहन्ति.. (१) ज्योति द्वारा घिरे हुए वेन नामक देव आकाश में सूर्यकिरणों से उत्पन्न जल को धरती पर गिराते हैं. सूर्य के साथ जल के मिलन के समय स्तोता अपनी स्तुतियों द्वारा वेन की अर्चना इस प्रकार करते हैं, जिस प्रकार माता-पिता बच्चों को गीतों से प्रसन्न करते हैं. (१) समुद्रादूर्मिमुदियर्ति वेनो नभोजाः पृष्ठं हर्यतस्य दर्शि.