ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1799, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमें है. वहीं से मैं सारे संसार में विस्तृत होती हूं एवं अपने विशाल शरीर से इस द्युलोक का स्पर्श करती हूं. (७) अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा. परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सं बभूव.. (८) मैं ही सब भुवनों का निर्माण करती हुई वायु के समान चलती हूं. मेरी महिमाएं ऐसी हैं कि धरती और द्युलोक से भी बड़ी हूं. (८) सूक्त—१२६ देवता—विश्वेदेव न तमंहो न दुरितं देवासो अष्ट मर्त्यम्. सजोषसो यमर्यमा मित्रो नयन्ति वरुणो अति द्विषः.. (१) हे देवो! उस पुरुष को कोई भी अमंगल एवं पाप प्राप्त नहीं करता, जिसे अर्यमा, मित्र एवं वरुण मिलकर शत्रु के हाथ से बचाते हैं. (१) तद्वि वयं वृणीमहे वरुण मित्रार्यमन्. येना निरंहसो यूयं पाथ नेथा च मर्त्यमति द्विषः.. (२) हे वरुण, मित्र एवं अर्यमा! हम तुमसे उसी रक्षा को मांगते हैं, जिससे तुम मानवों को निष्पाप करते हो एवं शत्रुओं से बचाते हो. (२) ते नूनं नोऽयमूतये वरुणो मित्रो अर्यमा. नयिष्ठा उ नो नेषणि पर्षिष्ठा उ नः पर्षण्यति द्विषः.. (३) वरुण, मित्र एवं अर्यमा निश्चय ही हमारी रक्षा करेंगे. तुम हमें आगे ले चलो, पापों से पार करो तथा शत्रु से बचाओ. (३) यूयं विश्वं परि पाथ वरुणो मित्रो अर्यमा. युष्माकं शर्मणि प्रिये स्याम सुप्रणीतयोऽति द्विषः.. (४) हे वरुण, मित्र एवं अर्यमा! तुम संसार की रक्षा करते हो. हे शोभन-नेतृत्व वाले देवो! हम तुम्हारे द्वारा दिया हुआ अनुकूल सुख भोगें एवं शत्रुओं से बचें. (४) आदित्यासो अति सिधो वरुणो मित्रो अर्यमा. उग्रं मरुद्धी रुद्रं हुवेमेन्द्रमग्निं स्वस्तयेऽति द्विषः.. (५) आदित्य, वरुण, मित्र और अर्यमा हमें शत्रु से बचावें. हम शत्रु से बचने एवं कल्याण पाने के लिए उग्र रुद्र, मरुद्गण, इंद्र एवं अग्नि को बुलाते हैं. (५) ebook converter DEMO Watermarks*