भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1800, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1800

नेतार ऊ षु णस्तिरो वरुणो मित्रो अर्यमा. अति विश्वानि दुरिता राजानश्चर्षणीनामति द्विषः.. (६) वरुण, मित्र और अर्यमा कुशल नेता हैं. ये हमें पाप से दूर ले जावें. प्रजाओं के स्वामी उक्त देव हमें सभी पापों एवं शत्रुओं से बचावें. (६) शुनमस्मभ्यमूतये वरुणो मित्रो अर्यमा. शर्म यच्छन्तु सप्रथ आदित्यासो यदीमहे अति द्विषः.. (७) वरुण, मित्र और अर्यमा रक्षा के साथ ही हमें सुख दें. आदित्यगण हमें विस्तृत सुख दें एवं शत्रुओं से बचावें. (७) यथा ह त्यद्वसवो गौर्यं चित्पदि षिताममुञ्चता यजत्राः. एवो ष्व१स्मन्मुञ्चता व्यंहः प्र तार्यग्ने प्रतरं न आयुः.. (८) यज्ञ करते हुए वसुओं ने पैरों से बंधी हुई गाय को छुड़ा दिया था. हे अग्नि! हमें उसी प्रकार पाप से छुड़ाओ एवं उत्तम तथा विशाल आयु दो. (८) सूक्त—१२७ देवता—रात्रि रात्री व्यख्यदायती पुरुत्रा देव्य१ क्षभिः. विश्वा अधि श्रियोऽधित.. (१) रात्रि देवी आती हुई चारों ओर विस्तृत हुईं एवं उन्होंने नक्षत्रों द्वारा संपूर्ण शोभा प्राप्त की. (१) ओर्वप्रा अमर्त्या निवतो देव्य१ द्वतः. ज्योतिषा बाधते तमः.. (२) मरणरहित व दिव्य रात्रि ने विस्तृत आकाश को व्याप्त किया तथा नीचे एवं ऊंचे रहने वाले पदार्थों को ढक लिया. रात्रि तारों के प्रकाश से अंधकार को बाधा पहुंचाती है. (२) निरु स्वसारमस्कृतोषसं देव्यायती. अपेदु हासते तमः.. (३) रात्रि देवी ने आकर उषा को अपनी बहिन के रूप में स्वीकार किया तथा अंधकार को हानि पहुंचाई. (३) सा नो अद्य यस्या वयं नि ते यामन्नविक्षमहि. वृक्षो न वसतिं वयः.. (४) हमारे लिए वह रात्रि कल्याणकारिणी बने, जिसके आने पर हम पेड़ पर रहने वाले पक्षियों के समान सो जाते हैं. (४) नि ग्रामासो अविक्षत नि पद्वन्तो नि पक्षिणः. नि श्येनासश्चिदर्थिनः.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*