ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1823, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्राहं मृगाणां मातरमरण्यानिमशंसिषम्.. (६) कस्तूरी आदि वन की सुगंधियां हैं. खाने की वस्तुएं तो बहुत हैं, पर कोई किसान नहीं है. मैंने पशुओं की माता के रूप में विशाल वनों की स्तुति की है. (६) सूक्त—१४७ देवता—इंद्र श्रत्ते दधामि प्रथमाय मन्यवेऽहन्यद्वृत्रं नर्यं विवेरपः. उभे यत्त्वा भवतो रोदसी अनु रेजते शुष्मात्पृथिवी चिदद्रिवः .. (१) हे इंद्र! तुम्हारे क्रोध पर मैं सर्वाधिक श्रद्धा करता हूं. तुमने वृत्र का वध किया एवं लोक हितकारी जल का निर्माण किया. हे वज्रधारी इंद्र! द्यावा-पृथिवी तुम्हारे अधीन हैं एवं अंतरिक्ष तुम्हारे भय से कांपता है. (१) त्वं मायाभिरनवद्य मायिनं श्रवस्यता मनसा वृत्रमर्दयः. त्वामिन्नरो वृणते गविष्टिषु त्वां विश्वासु हव्यास्र्विष्टिषु.. (२) हे प्रशंसनीय इंद्र! तुमने अन्न बनाने की अभिलाषा से मायावी वृत्र को अपनी शक्तियों द्वारा नष्ट किया. पणियों द्वारा चुराई गई गाएं पाने के लिए लोग तुम्हारी सेवा करते हैं. सभी यज्ञों एवं हवनों में तुम्हारी प्रशंसा की जाती है. (२) ऐषु चाकन्धि पुरुहूत सूरिषु वृधासो ये मघवन्नानशुर्मघम्. अर्चन्ति तोके तनये परिष्टिषु मेधसाता वाजिनमहये धने.. (३) हे बहुतों द्वारा बुलाए गए एवं धनी इंद्र! तुम इन विद्वानों के समीप प्रकट होओ. ये तुम्हारी कृपा से धनी एवं उन्नत बने हैं. ये लोग पुत्र, पौत्र एवं अन्य फल पाने के लिए एवं धन के निमित्त यज्ञों में शक्तिशाली इंद्र की पूजा करते हैं. (३) स इन्नु रायः सुभृतस्य चाकनन्मदं यो अस्य रंह्यं चिकेतति. त्वावृधो मघवन्दाश्वध्वरो मक्षू स वाजं भरते धना नृभिः.. (४) जो स्तोता अपनी स्तुतियों से इंद्र को सोमपान का आनंद देना जानता है, वही यथेष्ट धन पाने के लिए शीघ्र प्रार्थना कर सकता है. हे धनी इंद्र! तुम्हारे द्वारा बढ़ाया हुआ एवं यज्ञ में दान देने वाला यजमान शीघ्र ही अपने सेवकों द्वारा धन और अन्न से पूर्ण हो जाता है. (४) त्वं शर्धाय महिना गृणान उरु कृधि मघवञ्छग्धि रायः. त्वं नो मित्रो वरुणो न मायी पित्वो न दस्म दयसे विभक्ता.. (५) हे विशाल स्तोता द्वारा प्रशंसित एवं धनी इंद्र! तुम हमारे बलों का विस्तार करो एवं हमें धन दो. दर्शनीय इंद्र! तुम मित्र और वरुण के समान ज्ञानी हो. तुम हमारे लिए अन्न दो. (५) ebook converter DEMO Watermarks*