ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1824, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त—१४८ देवता—इंद्र सुष्वाणास इन्द्र स्तुमसि त्वा ससवांसश्च तुविनृम्ण वाजम्. आ नो भर सुवितं यस्य चाकन्त्मना तना सनुयाम त्वोताः.. (१) हे अधिक धन वाले इंद्र! हम सोमरस निचोड़कर तुम्हारी स्तुति करते हैं और तुम्हारे लिए अन्न एकत्र करते हैं. तुम अपनी मनचाही संपत्ति हमें दो. तुम्हारे द्वारा रक्षित होकर हम स्वयं ही धन प्राप्त करें. (१) ऋष्वस्त्वमिन्द्र शूर जातो दासीर्विशः सूर्येण सह्याः. गुहा हितं गुह्यं गूळहमप्सु बिभ्रमसि प्रस्रवणे न सोमम्.. (२) हे शूर एवं दर्शनीय इंद्र! तुम जन्म लेते ही सूर्य की सहायता से दास जाति के लोगों को हराते हो. तुम गुहा में छिपे एवं जल में डूबे हुए को भी हरा देते हो. वर्षा होने पर हम सोमरस प्रस्तुत करेंगे. (२) अर्यो वा गिरो अभ्यर्च विद्वानृषीणां विप्रः सुमतिं चकानः. ते स्याम ये रणयन्त सोमैरेनोत तुभ्यं रथोळह भक्षैः.. (३) हे मेधावी ऋषियों की स्तुति की अभिलाषा करने वाले विद्वान् एवं स्वामी इंद्र! तुम स्तोताओं की प्रार्थना पूरी करो. हम सोम के द्वारा तुम्हें सदा प्रसन्न करने वाले बनें. हे रथ पर बैठे हुए इंद्र! यह सारा भोज्य पदार्थ तुम्हें अर्पित है. (३) इमा ब्रह्मेन्द्र तुभ्यं शंसि दा नृभ्यो नृणां शूर शवः. तेभिर्भव सक्रतुर्येषु चाकन्नुत त्रायस्व गृणत उत स्तीन्.. (४) हे इंद्र! ये प्रधान स्तुतियां तुम्हारे लिए कही गई हैं. हे वीर इंद्र! श्रेष्ठ मानवों के लिए अन्न दो. जो तुम्हें चाहते हैं, उन में तुम शोभन यज्ञ वाले बनो. जो तुम्हारा स्तोत्र करने के लिए एकत्र हैं, उनकी रक्षा करो. (४) श्रुधी हवमिन्द्र शूर पृथ्या उत स्तवसे वेनस्यार्कैः. आ यस्ते योनिं घृतवन्तमस्वारूर्मिर्न निम्नैर्द्रवयन्त वक्वाः.. (५) हे शूर इंद्र! तुम मुझ पृथु ऋषि का आह्वान सुनो. मुझ वेनपुत्र के मंत्र तुम्हारी स्तुति करते हैं. मैंने घृतयुक्त यज्ञशाला में आकर तुम्हारी स्तुति की है. स्तोता नीचे गिरने वाली घी की धाराओं के समान ही दौड़ रहे हैं. (५) सूक्त—१४९ देवता—सविता ebook converter DEMO Watermarks*