भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1825

सविता यन्त्रैः पृथिवीमरम्णादस्कम्भने सविता द्यामदृंहत्. अश्वमिवाधुक्षद्धुनिमन्तरिक्षमतूर्ते बद्धं सविता समुद्रम्.. (१) सविता ने अनेक मंत्रों की सहायता से धरती को स्थिर किया है एवं बिना किसी सहारे के द्युलोक को दृढ़ता से बांध दिया है. आकाश में सागर के समान स्थित बादल घोड़े के समान शरीर कंपित करते हैं. बादल उपद्रवरहित स्थान में बंधा है. उसीसे सविता जल निकालते हैं. (१) यत्रा समुद्रः स्कभितो व्यौनदपां नपात्सविता तस्य वेद. अतो भूरत्त आ उत्थितं रजोऽतो द्यावापृथिवी अप्रथेताम्.. (२) अंतरिक्ष में वायु के पाशों से बंधा हुआ मेघ धरती को गीला करता है. जल के पुत्र सविता उस स्थान को जानते हैं. सविता से ही धरती व आकाश उत्पन्न हुए हैं एवं द्यावा- पृथिवी ने विस्तार पाया है. (२) पश्चेदमन्यदभवद्यजत्रममर्त्यस्य भुवनस्य भूना. सुपर्णो अङ्ग सवितुर्गुरुत्मान्पूर्वो जातः स उ अस्यानु धर्म.. (३) जिन देवों का यज्ञ मरणरहित एवं स्वर्ग में उत्पन्न सोम द्वारा पूरा होता है, वे सविता के बाद में जन्मे हैं. शोभन पंखों वाले गरुड़ सविता से पहले जन्मे हैं. इसी कारण गरुड़ सविता को धारण करके वर्तमान हैं. (३) गावइव ग्रामं यूयुधिरिवाश्वान्वाश्रेव वत्सं सुमना दुहाना. पतिरिव जायामभि नो न्येतु धर्ता दिवः सविता विश्ववारः.. (४) सबके वरणीय एवं द्युलोक को धारण करने वाले सविता हमारी ओर उसी प्रकार उत्सुकता से आते हैं, जिस प्रकार गाएं गांव की ओर आती हैं. योद्धा घोड़े की ओर जाते हैं. ब्याई हुई गाय बछड़े की ओर जाती है एवं पति पत्नी की ओर जाता है. (४) हिरण्यस्तूपः सवितर्यथा त्वाङ्गिरसो जुह्वे वाजे अस्मिन्. एवा त्वार्चन्नवसे वन्दमानः सोमस्येवांशं प्रति जागराहम्.. (५) हे सविता! मेरे पिता एवं अंगिरा के पुत्र हिरण्यस्तूप ऋषि तुम्हें यज्ञ में जिस प्रकार बुलाते थे एवं जिस प्रकार यजमान सोमलता की रक्षा के निमित्त सतर्क रहता है. मैं भी रक्षा के निमित्त तुम्हारी वंदना करता हुआ तुम्हारी सेवा के लिए उसी प्रकार सावधान हूं. (५) सूक्त—१५० देवता—अग्नि समिद्धश्चित्समिध्यसे देवेभ्यो हव्यवाहन. ebook converter DEMO Watermarks*