भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 190, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 190

तत्त्वा यामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदा शास्ते यजमानो हविर्भिः. अहेळमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मा न आयुः प्र मोषीः.. (११) हे वरुण! यजमान हव्य के द्वारा तुमसे जिस आयु की याचना करते हैं, मैं शक्तिशाली स्तोत्र के द्वारा तुम्हारी स्तुति करके उसी परम आयु की याचना करता हूं. तुम इस विषय में लापरवाही न करके ठीक से ध्यान दो. अगणित लोग तुम्हारी प्रार्थना करते हैं. तुम मुझसे मेरी आयु मत छीनो. (११) तदिन्नक्तं तद्दिवा मह्यमाहुस्तदयं केतो हृद आ वि चष्टे. शुनःशेपो यमह्वद्गृभीतः सो अस्मान् राजा वरुणो मुमोक्तु.. (१२) कर्त्तव्य को जानने वाले लोगों ने रात में और दिन में मुझसे यही कहा है. मेरे हृदय से उत्पन्न ज्ञान भी यही सलाह देता है. शुनःशेप ने सूर्य से बंधकर जिनको पुकारा था, वे ही राजा वरुण हमें बंधन से मुक्त करें. (१२) शुनःशेपो ह्यह्वद्गृभीतस्त्रिष्वादित्यं द्रुपदेषु बद्धः. अवैनं राजा वरुणः ससृज्याद्विदाँ अदब्धो वि मुमोक्तु पाशान्.. (१३) लकड़ी के तीन यूपों से बंधे हुए शुनःशेप ने अदिति के पुत्र वरुण का आह्वान किया था, इसलिए विद्वान् एवं दयालु राजा वरुण ने शुनःशेप को बंधन से छुड़ा दिया था. (१३) अव ते हेळो वरुण नमोभिरव यज्ञेभिरीमहे हविर्भिः. क्षयन्नस्मभ्यमसुर प्रचेता राजन्नेनांसि शिश्रथः कृतानि.. (१४) हे वरुण! हम नमस्कार करके एवं यज्ञों में हवि प्रदान करके तुम्हारे क्रोध को समाप्त करते हैं. हे अनिष्ट का नाश करने वाले बुद्धिमान् वरुण! हमारे कल्याण के लिए इस यज्ञ में निवास करो और हमारे पापों को कम करो. (१४) उदुत्तमं वरुण पाशमस्मदवाधमं वि मध्यमं श्रथाय. अथा वयमादित्य व्रते तवानागसो अदितये स्याम.. (१५) हे वरुण! मेरे सिर में बंधे हुए फंदे को ऊपर से और पैरों में बंधे हुए फंदे को नीचे से खोल दो तथा कमर में बंधे हुए फंदे को बीच में ढीला कर दो. हे अदितिपुत्र वरुण! हम तुम्हारे यज्ञ में सतत संलग्न रहकर पापमुक्त हो जाएंगे. (१५) सूक्त—२५ देवता—वरुण यच्चिद्धि ते विशो यथा प्र देव वरुण व्रतम्. मिनीमसि द्यविद्यवि.. (१) हे वरुण देव! संसार के विद्वान् तुम्हारे व्रत का अनुष्ठान करने में जिस प्रकार भूलें करते ebook converter DEMO Watermarks*