ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 191, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहैं, उसी प्रकार हमसे भी प्रतिदिन प्रमाद होता रहता है. (१) मा नो वधाय हत्नवे जिहीळानस्य रीरधः. मा हृणानस्य मन्यवे.. (२) हे वरुण! जो तुम्हारा अनादर करता है, तुम उसके लिए घातक बन जाते हो. तुम हमारा वध मत करना. तुम हमारे ऊपर क्रोध मत करना. (२) वि मृळीकाय ते मनो रथीरश्वं न सन्दितम्. गीर्भिर्वरुण सीमहि.. (३) हे वरुण देव! जिस प्रकार रथ का मालिक थके हुए घोड़े को स्वस्थ करता है, उसी प्रकार हम भी स्तुतियों द्वारा तुम्हारा मन प्रसन्न करते हैं. (३) परा हि मे विमन्यवः पतन्ति वस्यइष्टये. वयो न वसतीरुप.. (४) जिस प्रकार चिड़ियां अपने घोंसलों की ओर तेजी से उड़ती हैं, उसी प्रकार हमारी क्रोधरहित विचारधाराएं जीवन प्राप्त करने के लिए दौड़ रही हैं. (४) कदा क्षत्रश्रियं नरमा वरुणं करामहे. मृळीकायोरुचक्षसम्.. (५) हम शक्तिशाली नेताओं तथा अगणित लोगों पर दृष्टि रखने वाले वरुण को इस यज्ञ में ले आवेंगे. (५) तदित्समानमाशाते वेनन्ता न प्र युच्छतः. धृतव्रताय दाशुषे.. (६) मित्र और वरुण हव्य देने वाले यजमान पर प्रसन्न होकर हमारे द्वारा दिया हुआ साधारण हवि स्वीकार कर लेते हैं. वे कभी भी उसका त्याग नहीं करते. (६) वेदा यो वीनां पदमन्तरिक्षेण पतताम्. वेद नावः समुद्रियः.. (७) वरुण आकाश में उड़ने वाले पक्षियों और सागर में चलने वाली नौकाओं का मार्ग जानते हैं. (७) वेद मासो धृतव्रतो द्वादश प्रजावतः. वेदा य उपजायते.. (८) वरुण उक्त महिमा को धारण करके समय-समय पर उत्पन्न होने वाले बारह महीनों को जानते हैं और तेरहवें मास को भी जानते हैं. (८) वेद वातस्य वर्तनिमुरोर्ऋष्वस्य बृहतः. वेदा ये अध्यासते.. (९) वरुण विस्तार से संपन्न, दर्शनीय और अधिक गुण वाली वायु का मार्ग जानते हैं. वे आकाश में निवास करने वाले देवों से भी परिचित हैं. (९) नि षसाद धृतव्रतो वरुणः पस्त्या३स्वा. साम्राज्याय सुक्रतुः.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*