ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 214, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमें जानते हैं, वे बोलें. (६) वि सुपर्णो अन्तरिक्षाण्यख्यद्गभीरवेपा असुरः सुनीथः. क्वे३दानीं सूर्यः कश्चिकेत कतमां द्यां रश्मिरस्या ततान.. (७) गंभीर कंपन वाली, सबको प्राण देने वाली और सरलता से सब जगह पहुंचने वाली सूर्य की किरणें आकाश आदि तीनों लोकों में फैली हुई हैं. यह कौन बता सकता है कि इस समय सूर्य कहां है? सूर्य की किरणें किस स्वर्गलोक में विस्तृत हैं? (७) अष्टौ व्यख्यत्ककुभः पृथिव्यास्त्री धन्व योजना सप्त सिन्धून्. हिरण्याक्षः सविता देव आगाद्दधद्रत्ना दाशुषे वार्याणि.. (८) सूर्य ने पृथ्वी की आठों दिशाएं, प्राणियों के तीनों लोक और सातों नदियां प्रकाशित की हैं. सोने की आंखों वाले सूर्य द्रव्य देने वाले यजमान को उत्तम धन देते हुए यहां आवें. (८) हिरण्यपाणिः सविता विचर्षणिरुभे द्यावापृथिवी अन्तरीयते. अपामीवां बाधते वेति सूर्यमभि कृष्णेन रजसा द्यामृणोति.. (९) हाथों में सोना लिए हुए एवं विविध पदार्थों को देखते हुए सूर्य आकाश और धरती दोनों लोकों में जाते हैं. वे रोगों को दूर भगाते हैं, उदय होते हैं और अंधकार को नष्ट करने वाले प्रकाश को लेकर सारे आकाश को व्याप्त करते हैं. (९) हिरण्यहस्तो असुरः सुनीथः सुमृळीकः स्ववाँ यात्वर्वाङ्. अपसेधन्नक्षसो यातुधानानस्थाद्देवः प्रतिदोषं गृणानः.. (१०) हाथों में सोना लिए हुए, प्राणदाता, अच्छे नेता, सुख और धन देने वाले सविता यज्ञ में सामने से आवें. सूर्य देव प्रतिरात्रि स्तुति सुनकर यातुधानों और राक्षसों को यज्ञ से निकालकर स्थित हुए. (१०) ये ते पन्थाः सवितः पूर्व्यासोऽरेणवः सुकृता अन्तरिक्षे. तेभिर्नो अद्य पथिभिः सुगेभी रक्षा च नो अधि च ब्रूहि देव.. (११) हे सविता! आकाश में तुम्हारा मार्ग निश्चित, धूलिरहित एवं भली प्रकार बनाया गया है. तुम उसी मार्ग से आकर आज हमारी रक्षा करो. हे देव! हमारी बातें देवताओं तक पहुंचा दो. (११) सूक्त—३६ देवता—अग्नि प्र वो यह्वं पूरूणां विशां देवयतीनाम्. अग्निं सूक्तेभिर्वचोभीरीमहे यं सीमिदन्य ईळते.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*