भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 215, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 215

देवों की कामना करने वाले हम बहुसंख्यक प्रजाजनों पर अनुग्रह के निमित्त सूक्तरूपी वचनों द्वारा महान् अग्नि की प्रार्थना करते हैं. अन्य ऋषिगण भी इसी अग्नि की स्तुति करते हैं. (१) जनासो अग्निं दधिरे सहोवृधं हविष्मन्तो विधेम ते. स त्वं नो अद्य सुमना इहाविता भवा वाजेषु सन्त्य.. (२) यज्ञ करने वाले लोगों ने शक्तिवर्धक अग्नि को धारण किया था. हे अग्नि! हम लोग हवि लेकर तुम्हारी सेवा करते हैं. तुम अन्नदान में तत्पर हो. आज इस यज्ञ में हम पर परम प्रसन्न होकर हमारे रक्षक बनो. (२) प्र त्वा दूतं वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम्. महस्ते सतो वि चरन्त्यर्चयो दिवि स्पृशन्ति भानव:.. (३) हे अग्नि! तुम यज्ञ के होता एवं सर्वज्ञ हो. हम तुम्हें देवों का दूत समझकर वरण करते हैं. तुम महान् और नित्य हो. तुम्हारी चमक बढ़ती है. तुम्हारी किरणें आकाश को छूती हैं. (३) देवासस्त्वा वरुणो मित्रो अर्यमा सं दूतं प्रत्नमिन्धते. विश्वं सो अग्ने जयति त्वया धनं यस्ते ददाश मर्त्य:.. (४) हे अग्नि! वरुण, मित्र और अर्यमा—ये तीनों देव तुम्हें अपना प्राचीन दूत समझकर भली प्रकार चमकाते हैं. जो यजमान तुम्हें हवि देता है, वह तुम्हारे द्वारा सभी प्रकार की संपत्ति जीत लेता है. (४) मन्द्रो होता गृहपतिरग्ने दूतो विशामसि. त्वे विश्वा संगतानि व्रता ध्रुवा यानि देवा अकृण्वत.. (५) हे अग्नि! तुम देवों को बुलाने वाले, यजमान रूप प्रजाओं के पालक एवं हर्षित करने वाले हो. तुम देवताओं के दूत हो. पृथ्वी आदि देवता जो स्थिर कर्म करते हैं, वे तुम में मिल जाते हैं. (५) त्वे इदग्ने सुभगे यविष्ठ्य विश्वमा हूयते हवि:. स त्वं नो अद्य सुमना उतापरं यक्षि देवान्त्सुवीर्या.. (६) हे युवक अग्नि! तुझ परम सौभाग्यशाली को लक्ष्य करके सब हव्य दिए जाते हैं. तुम प्रसन्न मन होकर आज, कल और सर्वदा सुंदर एवं शक्तिशाली देवों का यज्ञ करो. (६) तं घेमित्था नमस्विन उप स्वराजमासते. होत्राभिरग्निं मनुष: समिन्धते तितीर्वांसो अति स्रिध:.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*