ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 231, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्रुधि श्रुत्कर्ण वह्निभिर्देवैरग्ने सयावभिः. आ सीदन्तु बर्हिषि मित्रो अर्यमा प्रातर्यावाणो अध्वरम्.. (१३) हे सुनने में समर्थ कानों वाले अग्नि! हमारी स्तुति सुनो. मित्र, अर्यमा तथा जो अन्य देवता प्रातःकाल देवयज्ञ में जाते हैं, अपने साथ आने वाले अन्य हव्यवाही देवों सहित तुम यज्ञ के निमित्त बिछे हुए कुशों पर बैठो. (१३) शृण्वन्तु स्तोमं मरुतः सुदानवोऽग्निजिह्वा ऋतावृधः. पिबतु सोमं वरुणो धृतव्रतोऽश्विभ्यामुषसा सजूः.. (१४) शोभन फलदाता, अग्नि रूपी जिह्वा वाले एवं यज्ञ की वृद्धि करने वाले मरुद्गण हमारा स्तोत्र सुनें. वे व्रत धारण करने वाले वरुण, अश्विनीकुमार एवं उषा के साथ सोमपान करें. (१४) सूक्त—४५ देवता—अग्नि त्वमग्ने वसूँरिह रुद्राँ आदित्याँ उत. यजा स्वध्वरं जनं मनुजातं घृतप्रुषम्.. (१) हे अग्नि! तुम इस अनुष्ठान में वसुओं, रुद्रों और आदित्यों का यजन करो. तुम शोभन यज्ञ करने वाले, प्रजापति मनु द्वारा उत्पादित एवं जल सींचने वालों की भी अर्चना करो. (१) श्रुष्टीवानो हि दाशुषे देवा अग्ने विचेतसः. तान् रोहिदश्व गिर्वणस्त्रयस्त्रिंशतमा वह.. (२) हे अग्नि! विशेष बुद्धि वाले देवता हव्य देने वाले यजमान को फल देते हैं. हे रोहित अश्व के स्वामी एवं स्तुतिपात्र अग्नि! तुम तैंतीस देवों को यहां ले आओ. (२) प्रियमेधवदत्रिवज्जातवेदो विरूपवत्. अङ्गिरस्वन्महिव्रत प्रस्कण्वस्य श्रुधी हवम्.. (३) हे अनेक कर्म करने वाले एवं सर्वज्ञ अग्नि! प्रियमेधा, अत्रि, विरूप और अंगिरा नामक ऋषियों के समान प्रस्कण्व की पुकार भी सुनो. (३) महिकेरव ऊतये प्रियमेधा अहूषत. राजन्तमध्वराणामग्निं शुक्रेण शोचिषा.. (४) प्रौढ़कर्मा एवं प्रिय यज्ञों से सुशोभित ऋषियों ने अपनी रक्षा के लिए यज्ञ के मध्य शुद्ध प्रकाश द्वारा चमकने वाले अग्नि का आह्वान किया था. (४) घृताहवन सन्त्येमा उ षु श्रुधी गिरः. ebook converter DEMO Watermarks*