ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 242, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंलिए शतद्वार नामक यंत्र का प्रयोग किया था, तब तुमने उन्हें मार्ग बताया था. तुमने विमद ऋषि के लिए अन्नयुक्त धन प्रदान किया था, इसी प्रकार तुमने संग्राम में विजय प्राप्ति के लिए स्तुति करने वाले अनेक स्तोताओं को वज्र चलाकर बचाया था. (३) त्वमपामपिधानाऽवृणोरपाधारयः पर्वते दानुमद्वसु. वृत्रं यदिन्द्र शवसावधीरहिमादित्सूर्य दिव्यारोहयो दृशे.. (४) हे इंद्र! तुमने जल के अवरोधक मेघों को हटा दिया है एवं वृत्र आदि असुरों को पराजित करके उनका धन पर्वत पर छिपा दिया है. तुमने तीनों लोकों की हिंसा करने वाले वृत्र का वध किया एवं उसके तुरंत पश्चात् संसार को देखने के लिए सूर्य को आकाश में चढ़ा दिया था. (४) त्वं मायाभिरप मायिनोऽधमः स्वधाभिर्ये अधि शुप्तावजुह्वत. त्वं पिप्रोनृमणः प्रारुजः पुरः प्र ऋजिश्वानं दस्युहत्येष्वाविथ.. (५) हे इंद्र! जो असुर हविष्य अन्नों से सुशोभित अपने मुखों में ही यज्ञीय सामग्री डाल लेते थे, तुमने उन मायावियों को माया द्वारा पराजित किया था. हे यजमानों पर अनुग्रहबुद्धि रखने वाले इंद्र! तुमने पिप्रु असुर के निवासस्थान ध्वस्त कर दिए थे. तुमने हत्या करने के लिए उद्यत दस्युओं के हाथों में पड़े ऋजिश्वान् की पूर्णतया रक्षा की थी. (५) त्वं कुत्सं शुष्णहत्येष्वाविथारन्धयोऽतिथिग्वाय शम्बरम्. महान्तं चिदर्बुदं नि क्रमीः पदा सनादेव दस्युहत्याय जज्ञिषे.. (६) हे इंद्र! तुमने शुष्ण असुर के साथ भयानक संग्राम में कुत्स ऋषि की रक्षा की थी तथा अतिथियों का स्वागत करने वाले दिवोदास को बचाने के लिए शंबर असुर का वध किया था. तुमने अर्बुद नामक महान् असुर को पैरों से कुचल डाला था. इस प्रकार तुम्हारा जन्म दस्युनाश के लिए हुआ जान पड़ता है. (६) त्वे विश्वा ताविषी सध्म्यग्घिता तव राधः सोमपीथाय हर्षते. तव वज्रश्चिकिते बाह्वोर्हितो वृश्चा शत्रोरव विश्वानि वृष्ण्या.. (७) हे इंद्र! तुम में संपूर्ण बल निहित है एवं सोमरस पीने के बाद तुम्हारा मन अत्यंत प्रसन्न हो जाता है. हम यह जानते हैं कि तुम्हारे दोनों हाथों में वज्र रहता है. इसलिए तुम शत्रुओं का समस्त बल छिन्न करो. (७) वि जानीह्यार्यान्ये च दस्यवो बर्हिष्मते रन्धया शासदव्रतान्. शाकी भव यजमानस्य चोदिता विश्वेत्ता ते सधमादेषु चाकन.. (८) हे इंद्र! पहले तुम यह बात जानो कि कौन आर्य है और कौन दस्यु? इसके पश्चात् तुम कुशयुक्त यज्ञों का विरोध करने वालों को नष्ट करके उन्हें यजमानों के वश में लाओ. तुम ebook converter DEMO Watermarks*