ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 245, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहैं. (३) आ यं पृणन्ति दिवि सद्मबर्हिषः समुद्रं न सुभव१ स्वा अभिष्टयः. तं वृत्रहत्ये अनु तस्थुरूूतयः शुष्मा इन्द्रमवाता अहुतप्सवः.. (४) जिस प्रकार समुद्र की ओर दौड़ती हुई इसकी आत्मीय सरिताएं उसे पूर्ण करती हैं, उसी प्रकार कुशों पर रखा हुआ सोमरस स्वर्गलोक में अवस्थित इंद्र को पूर्णता प्रदान करता है. शत्रुओं का शोषण करने वाले, शत्रुरहित एवं शोभन शरीर मरुद्गण वृत्रवध के समय उन्हीं के सहायक के रूप में उनके पास खड़े थे. (४) अभि स्ववृष्टिं मदे अस्य युध्यतो रघ्वीरिव प्रवणे सस्रूरतयः. इन्द्रो यद्वज्री धृषमाणो अन्धसा भिनद्वलस्य परिधींरिव त्रितः.. (५) जिस प्रकार स्वभाव के अनुसार जल नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार इंद्र के सहायक मरुद्गण सोमपान द्वारा प्रसन्न होकर इंद्र के साथ युद्ध करते हुए वृष्टि के स्वामी वृत्र के सामने गए. जिस प्रकार त्रित नामक पुरुष ने परिधियों का भेदन किया था, उसी प्रकार इंद्र ने सोमरस से शक्तिशाली बनकर बल नामक असुर को विदीर्ण कर दिया था. (५) परीं घृणा चरति तित्विषे शवोऽपो वृत्वी रजसो बुध्नमाशयत्. वृत्रस्य यत्प्रवणे दुर्गुभिष्वनो निजघन्थ हन्वोरिन्द्र तन्यतुम्.. (६) हे इंद्र! वृत्र नामक असुर जल को रोककर आकाश में सोया था. आकाश में वृत्र के विस्तार की कोई सीमा नहीं थी. तुमने अपने शब्द करते हुए वज्र के द्वारा उसी वृत्र की ठोड़ी को जिस समय घायल किया था, उसी समय तुम्हारा शत्रुविजयी तेज विस्तृत हो गया एवं तुम्हारा बल सर्वत्र प्रकाशित हो गया. (६) हृदं न हि त्वा न्यृषन्त्युर्मयो ब्रह्माणीन्द्र तव यानि वर्धना. त्वष्टा चित्ते युज्यं वावृधे शवस्ततक्ष वज्रमभिभूत्योजसम्.. (७) हे इंद्र! जिस प्रकार जल के प्रवाह जलाशय में पहुंच जाते हैं, उसी प्रकार तुम्हारी वृद्धि करने वाले स्तोत्र तुम्हें प्राप्त हो जाते हैं. त्वष्टा देव ने ही तुम्हारे योग्य तुम्हारा बल बढ़ाया है. उसी ने शत्रुओं को अभिभूत करने वाले तेज से संपन्न तुम्हारे वज्र को तीक्ष्ण बनाया है. (७) जघन्वां उ हरिभिः संभृतक्रतविन्द्र वृत्रं मनुषे गातुयन्नपः. अयच्छथा बाह्वोर्वज्रमायसमधारयो दिव्या सूर्यं दृशे.. (८) हे यज्ञकर्म संपादक इंद्र! तुमने अपने भक्तजनों के समीप आने के लिए रथ में अश्व जोड़कर वृत्र असुर का नाश किया, रुके हुए जल की वर्षा की, अपने दोनों बाहुओं में वज्र धारण किया एवं हम सबके दर्शन के निमित्त सूर्य को आकाश में स्थापित किया. (८) ebook converter DEMO Watermarks*