भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 262, कुल 1855 में से

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इन्हीं इंद्र के भय से पर्वत स्थिर हैं एवं इनके प्रकट होने पर धरती और आकाश भय से कांपने लगते हैं. नोधा नामक ऋषि ने इन्हीं सुंदर एवं दुःखविनाशक इंद्र की रक्षा शक्ति की अपने सूक्तों द्वारा बार-बार प्रशंसा करके अविलंब शक्ति प्राप्त की थी. (१४) अस्मा इदु त्यदनु दाय्येषामेको यद्वव्रे भूरेरीशानः. प्रैतशं सूर्ये पस्पृधानं सौवश्व्ये सुष्विमावदिन्द्रः.. (१५) अकेले ही शत्रु विजय में समर्थ एवं अनेक प्रकार के स्वामी इंद्र ने स्तोताओं से जिस प्रकार की स्तुति की इच्छा की थी, उन्हें वही स्तुति प्रदान की गई है. स्वश्व के पुत्र सूर्य के साथ युद्ध करते समय सोमरस निचोड़ने वाले एतश ऋषि को इंद्र ने बचाया. (१५) एवा ते हरियोजना सुवृक्तीन्द्र ब्रह्माणि गोतमासो अक्रन्. ऐषु विश्वपेशां धियं धाः प्रातर्मक्षू धियावसुर्जगम्यात्.. (१६) हे इंद्र! तुम घोड़ों समेत रथ के स्वामी हो. तुम्हें अपने यज्ञ में बुलाने के लिए गोतम गोत्र वाले ऋषियों ने तुम्हारे प्रति स्तुति रूपी मंत्र कहे हैं. तुम उनकी अनेक प्रकार से उन्नति करो. बुद्धि द्वारा धन प्राप्त करने वाले इंद्र प्रातःकाल शीघ्र आवें. (१६) सूक्त—६२ देवता—इंद्र प्र मन्महे शवसानाय शूषमाङ्गूषं गिर्वणसे अङ्गिरस्वत्. सुवृक्तिभिः स्तुवत ऋग्मियायार्चामार्कं नरे विश्रुताय.. (१) हम अंगिरा ऋषि के समान शत्रुनाशक एवं स्तुतिपात्र इंद्र को सुख देनेवाली स्तुतियों को भली प्रकार जानते हैं. शोभन स्तोत्रों द्वारा स्तुति करने वाले ऋषियों के अर्चनीय एवं सबके नेता रूप इंद्र की हम स्तोत्रों द्वारा पूजा करते हैं. (१) प्र वो महे महि नमो भरध्वमाङ्गूष्यं शवसानाय साम. येना नः पूर्वे पितरः पदज्ञा अर्चन्तो अङ्गिरसो गा अविन्दन्.. (२) हे ऋत्विजो! महान् एवं बलसंपन्न इंद्र के प्रति उत्तम एवं प्रौढ़ स्तोत्र का उच्चारण करो. हमारे पूर्वज अंगिरा गोत्रीय ऋषि पणि नामक असुरों द्वारा चुराई हुई गौओं के पद चिह्न देखते हुए गए एवं इंद्र की सहायता से उनका उद्धार किया. (२) इन्द्रस्याङ्गिरसां चेष्टौ विदत्सरमा तनयाय धासिम्. बृहस्पतिर्भिनदद्रिं विदद्गाः समुस्त्रियाभिर्वावशन्त नरः.. (३) इंद्र एवं अंगिरा गोत्रीय ऋषियों द्वारा गायों को खोजने के लिए भेजी गई सरमा नामक कुतिया ने अपने बच्चों के लिए अन्न प्राप्त किया था. सरमा द्वारा बताए जाने पर इंद्र ने असुर ebook converter DEMO Watermarks*