भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 261, कुल 1855 में से

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अस्येदेव प्र रिरिचे महित्वं दिवस्पृथिव्याः पर्यन्तरिक्षात्. स्वराळिन्द्रो दम आ विश्वगूर्तः स्वरिरमत्रो ववक्षे रणाय.. (९) इंद्र की महिमा आकाश, धरती और उनके मध्यवर्ती लोक से भी बढ़कर है. इंद्र अपने इस निवासस्थान में अपने तेज से सुशोभित, सभी कार्य करने में कुशल, शक्तिशाली शत्रु का नाश करने में समर्थ एवं युद्ध करने में निपुण हैं. इंद्र अपने मेघ रूप शत्रु को युद्ध के लिए ललकारते हैं. (९) अस्येदेव शवसा शुष्णन्तं वि वृश्चद्वज्रेण वृत्रमिन्द्रः. गा न व्राणा अवनीरमुञ्चदभि श्रवो दावने सचेताः.. (१०) इंद्र ने अपनी ही शक्ति से जल रोकने वाले वृत्र का उच्छेद कर दिया था. जिस प्रकार चोरों द्वारा रोकी हुई गाएं इंद्र ने छुड़वा दी थीं, उसी प्रकार वृत्र द्वारा रोका हुआ विश्व का रक्षक जल छुड़वा दिया था. इंद्र हव्य देने वाले को इच्छानुसार अन्न देते हैं. (१०) अस्येदु त्वेषा रन्त सिन्धवः परि यद्वज्रेण सीमयच्छत्. ईशानकृद्दाशुषे दशस्यन्तुर्वीतये गाधं तुर्वणिः कः.. (११) इंद्र ने वज्र द्वारा नदियों की सीमा निश्चित कर दी है, अतः इंद्र के बल के कारण गंगा आदि सरिताएं अपने-अपने स्थान पर सुशोभित हैं. इंद्र ने अपने को ऐश्वर्यवान् बनाकर हव्यदाता यजमान को फल प्रदान करते हुए तुर्वीति ऋषि के हेतु निवास योग्य स्थल अविलंब बना दिया था. (११) अस्मा इदु प्र भरा तूतुजानो वृत्राय वज्रमीशानः कियेधाः. गोर्न पर्व वि रदा तिरश्चेष्यन्नर्णान्स्यपां चरध्यै.. (१२) हे शीघ्रताकारक, सबके स्वामी एवं अपरिमित बलशाली इंद्र! तुम इस वृत्र के ऊपर वज्र का प्रहार करो. जिस प्रकार मांस के विक्रेता पशु के अंगों को काटते हैं, उसी प्रकार तुम वृत्र के शरीर के जोड़ अपने वज्र से तिरछे रूप में काटो, इससे वर्षा होगी और धरती पर जल बहने लगेगा. (१२) अस्येदु प्र ब्रूहि पूर्व्याणि तुरस्य कर्माणि नव्य उक्थैः. युधे यदिष्णान आयुधान्यघायमाणो निरिणाति शत्रून्.. (१३) हे स्तोता! स्तुति के योग्य एवं युद्ध के लिए शीघ्रता करने वाले इंद्र के पूर्व कर्मों की प्रशंसा करो. इंद्र युद्ध में शत्रुघात के निमित्त आयुधों को बार-बार फेंकते हुए उनके सामने जाते हैं. (१३) अस्येदु भिया गिरयश्च दृळ्हा द्यावा च भूमा जनुषस्तुजेते. उपो वेनस्य जोगुवान ओणिंसद्यो भुवद्वीर्याय नोधाः.. (१४) ebook converter DEMO Watermarks*