ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 278, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंआ रोदसी बृहती वेविदानाः प्र रुद्रिया जभ्रिरे यज्ञियासः. विदन्मर्तो नेमधिता चिकित्त्वानग्निं पदे परमे तस्थिवांसम्.. (४) यज्ञपात्र देवों ने विस्तृत आकाश एवं धरती के बीच रहकर अग्नि के योग्य स्तुतियां की थीं. मरुद्गणों ने इंद्र के साथ जाना कि अग्नि उत्तम स्थान में छिपे हैं. इसके पश्चात् उन्हें प्राप्त किया. (४) संजानाना उप सीदन्नभिज्ञु पत्नीवन्तो नमस्यं नमस्यन्. रिरिक्वांसस्तन्वः कृण्वत स्वाः सखा सख्युर्निमिषि रक्षमाणाः.. (५) हे अग्नि! देवगण तुम्हें भली प्रकार जानकर बैठ गए एवं अपनी स्त्रियों के साथ तुम्हारी पूजा करने लगे. तुम उनके सामने घुटनों के सहारे बैठे थे. देवता तुम्हारे सखा एवं तुम्हारे द्वारा रक्षित थे. उन्होंने अपने मित्र अग्नि को देखा तो अपने शरीरों को सुखाते हुए यज्ञ करने लगे. (५) त्रिः सप्त यद्गुह्यानि त्वे इत्पदाविन्दन्निहिता यज्ञियासः. तेभी रक्षन्ते अमृतं सजोषाः पशूञ्च स्थातॄञ्चरथं च पाहि.. (६) हे अग्नि! यजमानों ने तुम्हारे भीतर छिपे हुए इक्कीस तत्त्वों को जाना. जानकर वे उन्हीं से तुम्हारी रक्षा करते हैं. तुम यजमानों के प्रति उतना प्रेम रखते हुए उनके पशुओं एवं स्थावर-जंगम धन की रक्षा करो. (६) विद्वाँ अग्ने वयुनानि क्षितीनां व्यानुषक्छुरुधो जीवसे धाः. अन्तर्विद्वाँ अध्वनो देवयानानतन्द्रो दूतो अभवो हविर्वाट्.. (७) हे अग्नि! समस्त ज्ञातव्य बातों को जानते हुए तुम यजमानरूपी प्रजाओं के जीवन के लिए भूख रूपी रोग को दूर करो. धरती और आकाश के मध्य देवों के जाने के मार्गों को जानते हुए तुम आलस्य छोड़कर देवों के दूतरूप में हवि वहन करो. (७) स्वाध्यो दिव आ सप्त यह्वी रायो दुरो व्यृतज्ञा अजानन्. विदद्गव्यं सरमा दृळ्हमूर्वं येना नु कं मानुषी भोजते विट्.. (८) हे अग्नि! तुमने शोभन कर्म युक्त सात महान् नदियों को आकाश से निकालकर धरती पर बहाया है. यज्ञ को जानने वाले अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने बल नामक असुर द्वारा चुराई गई गायों का मार्ग तुमसे जाना था. तुम्हारी ही कृपा से सरमा ने अंगिराओं से गोदुग्ध पाया था. उसी गोदुग्ध से मानवों की रक्षा होती है. (८) आ ये विश्वा स्वपत्यानि तस्थुः कृण्वानासो अमृतत्वाय गातुम्. मह्ना महद्भिः पृथिवी वि तस्थे माता पुत्रैरदितिर्धायसे वेः.. (९) ebook converter DEMO Watermarks*