भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 279, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 279

आदित्यों ने अमरण भाव की सिद्धि के लिए उपाय करते हुए पतनरहित होने के लिए कर्म किए एवं उन महानुभावों के सहित उनकी अदीना माता पृथ्वी ने समस्त जगत् को धारण करने के लिए विशेष महत्त्व प्राप्त किया था. हे अग्नि देव! यह सब इसी कारण हो सका कि तुमने उस यज्ञ का हवि भक्षण किया था. (९) अधि श्रियं नि दधुश्चारुमस्मिन्दिवो यदक्षी अमृता अकॄण्वन्. अध क्षरन्ति सिन्धवो न सृष्टाः प्र नीचीरग्ने अरुषीरज store? -> wait: अरुषीरज store? No, अरुषीरज store is 'अरुषीरजानन्..' -> 'अरुषीरजानन्..' let's write अरुषीरजानन्.. (१०) यजमानों ने इस अग्नि में शोभन यज्ञ संपत्ति स्थापित की एवं यज्ञ का चक्षुरूप घृत डाला. इससे मरणरहित देव यज्ञ का समय जानकर आए. हे अग्नि! तुम्हारी प्रकाशयुक्त ज्वालाएं सरिताओं के समान समस्त दिशाओं में फैल गईं एवं आए हुए देवों ने उन्हें जाना. (१०) सूक्त—७३ देवता—अग्नि र