भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 305, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 305

हमारी निशाएं एवं उषाएं माधुर्ययुक्त हों. पृथ्वी से संबंध रखने वाले जन एवं सबका पालनकर्त्ता आकाश हमें सुखद हो. (७) मधुमान्नो वनस्पतिर्मधुमाँ अस्तु सूर्य:. माध्वीर्गावो भवन्तु न:.. (८) वनस्पतियां, सूर्य एवं गाएं हमारे लिए मधुयुक्त हों. (८) शं नो मित्रः शं वरुणः शं नो भवत्वर्यमा. शं न इन्द्रो बृहस्पतिः शं नो विष्णुरुरुक्रमः.. (९) मित्र, वरुण, अर्यमा, इंद्र, बृहस्पति एवं लंबे डग भरने वाले विष्णु हमारे लिए सुखदाता हों. (९) सूक्त—९१ देवता—सोम त्वं सोम प्र चिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठमनु नेषि पन्थाम्. तव प्रणीती पितरो न इन्दो देवेषु रत्नमभजन्त धीरा:.. (१) हे सोम! तुम हमारी बुद्धि द्वारा भली-भांति ज्ञात हो. तुम हमें सरल मार्ग से ले चलो. हे विश्व को अमृतमय करने वाले सोम! तुम्हारे निर्देश के अनुसार चलकर हमारे पितरों ने देवों के मध्य धन प्राप्त किया था. (१) त्वं सोम क्रतुभिः सुक्रतुर्भूस्त्वं दक्षैः सुदक्षो विश्ववेदा:. त्वं वृषा वृषत्वेभिर्महित्वा द्युम्नेभिर्द्युम्न्यभवो नृचक्षा:.. (२) हे सर्वज्ञ सोम! तुम अपने शोभन यज्ञों के कारण यज्ञसंपन्न करने वाले, अपने बल द्वारा शक्तिशाली एवं अभीष्ट वर्षा के महत्त्व से कामवर्धक हो. तुम यजमानों के मनोवांछित फलदाता होकर उनके द्वारा विपुल मात्रा में दिए गए अन्न से संपन्न हो. (२) राज्ञो नु ते वरुणस्य व्रतानि बृहद्गभीरं तव सोम धाम. शुचिष्ट्वमसि प्रियो न मित्रो दक्षाय्यो अर्यमेवासि सोम.. (३) हे सोम! ब्राह्मणों के राजा वरुण से संबंधित यज्ञ तुम्हारे ही हैं, इसलिए तुम्हारा तेज विस्तृत एवं गंभीर है. तुम वरुण के समान सबके सुधारकर्त्ता एवं अर्यमा के समान वृद्धि करने वाले हो. (३) या ते धामानि दिवि या पृथिव्यां या पर्वतेष्वोषधीष्वप्सु. तेभिर्नो विश्वैः सुमना अहेळन्नराजन्त्सोम प्रति हव्या गृभाय.. (४) हे शोभनयुक्त सोम! आकाश, धरती, पर्वतों, ओषधियों एवं जल में वर्तमान अपने तेज ebook converter DEMO Watermarks*