ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 306, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसे तेजस्वी होकर क्रोध न करते हुए हमारा हव्य स्वीकार करो. (४) त्वं सोमासि सत्पतिस्त्वं राजोत वृत्रहा. त्वं भद्रो असि क्रतुः.. (५) हे सोम! तुम सत्कर्मों में ब्राह्मणों के स्वामी, तेजस्वी एवं शोभन यज्ञों वाले हो. (५) त्वं च सोम नो वशो जीवातुं न मरामहे. प्रियस्तोत्रो वनस्पतिः.. (६) हे स्तुतिप्रिय एवं वनस्पतिपालक सोम! यदि तुम हम यजमानों के लिए जीवनदायिनी ओषधि की अभिलाषा करो तो हम मृत्युरहित हो सकते हैं. (६) त्वं सोम महे भगं त्वं यून ऋतायते. दक्षं दधासि जीवसे.. (७) हे सोम! तुम वृद्ध एवं युवा यजमान को जीवनोपयोगी धन देते हो. (७) त्वं नः सोम विश्वतो रक्षा राजनघायतः. न रिष्येत्त्वावतः सखा.. (८) हे तेजस्वी सोम! जो लोग हमें दुःख देना चाहते हैं, उनसे हमें बचाओ, क्योंकि तुम जैसे देव का मित्र कभी विनष्ट नहीं होता. (८) सोम यास्ते मयोभुव ऊतयः सन्ति दाशुषे. ताभिर्नोऽविता भव.. (९) हे सोम! यजमानों को देने के लिए तुम्हारे पास सुखद रक्षासाधन हैं, उन्हीं के द्वारा हमारे रक्षक बनो. (९) इमं यज्ञमिदं वचो जुजुषाण उपागहि. सोम त्वं नो वृधे भव.. (१०) हे सोम! हमारे इस यज्ञ और स्तुतिवचन को स्वीकार करके हमारे समीप आओ और हमारे यज्ञ की वृद्धि करो. (१०) सोम गीर्भिष्ट्वा वयं वर्धयामो वचोविदः. सुमृळीको न आ विश.. (११) हे सोम! स्तुतियों के जानने वाले हम लोग स्तुतिवचनों से तुम्हें बढ़ाते हैं. तुम हमें सुखी करते हुए आओ. (११) गयस्फानो अमीवहा वसुवित्पुष्टिवर्धनः. सुमित्रः सोम नो भव.. (१२) हे सोम! तुम हमारे धनवर्द्धक, रोगनाशक, संपत्तिदाता, संपत्ति बढ़ाने वाले एवं सुमित्र बनो. (१२) सोम रारन्धि नो हृदि गावो न यवसेष्वा. मर्य इव स्व ओक्ये.. (१३) हे सोम! जिस प्रकार गाएं सुंदर घास से एवं मनुष्य अपने घर में रहने से प्रसन्न होते हैं, ebook converter DEMO Watermarks*