भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 307, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 307

उसी प्रकार तुम हमारे द्वारा दिए गए हव्य से तृप्त होकर हमारे हृदय में निवास करो. (१३) यः सोमः सख्ये तव रारणद्देव मर्त्यः. तं दक्षः सचते कविः.. (१४) हे सर्वदर्शी एवं सर्वकार्य समर्थ सोम! तुम्हारी मित्रता के कारण जो यजमान तुम्हारी स्तुति करता है, तुम उस पर अनुग्रह करते हो. (१४) उरुष्या णो अभिशस्तेः सोम नि पाह्यंहसः. सखा सुशेव एधि नः.. (१५) हे सोम! हमें निंदा एवं पाप से बचाओ तथा शोभन सुख देकर हमारे हितकारी बनो. (१५) आ प्यायस्व समेतु ते विश्वतः सोम वृष्ण्यम्. भवा वाजस्य सङ्गथे.. (१६) हे सोम! तुम वृद्धि प्राप्त करो एवं तुम्हें चारों ओर अपनी शक्ति प्राप्त हो. तुम हमें अन्न देने वाले बनो. (१६) आ प्यायस्व मदिन्तम सोम विश्वेभिरंशुभिः. भवा नः सुश्रवस्तमः सखा वृधे.. (१७) हे अतिशय मदयुक्त सोम! तुम समस्त लताओं के भागों से वृद्धि प्राप्त करो एवं शोभन अन्न से युक्त होकर हमारे मित्र बनो. (१७) सं ते पयांसि समु यन्तु वाजाः सं वृष्ण्यान्यभिमातिषाहः. आप्यायमानो अमृताय सोम दिवि श्रवांस्युत्तमानि धिष्व.. (१८) हे शत्रुनाशक सोम! तुम में दूध, अन्न एवं वीर्य सम्मिलित हो. तुम हमारी अमरता के लिए बढ़ते हुए स्वर्ग में उत्कृष्ट अन्न धारण करो. (१८) या ते धामानि हविषा यजन्ति ता ते विश्वा परिभूरस्तु यज्ञम्. गयस्फानः प्रतरणः सुवीरोऽवीरहा प्र चरा सोम दुर्यान्.. (१९) हे सोम! यजमान हव्य के द्वारा तुम्हारे जिन तेजों की पूजा करते हैं, वे ही हमारे यज्ञ को चारों ओर प्राप्त हों. हे धनवर्द्धक! पाप से रक्षा करने वाले, शोभन वीरों से युक्त एवं पुत्रों के रक्षक सोम! तुम हमारे घरों में आओ. (१९) सोमो धेनुं सोमो अर्वन्तमाशुं सोमो वीरं कर्मण्यं ददाति. सादन्यं विदथ्यं सभेयं पितृश्रवणं यो ददाशदस्मै.. (२०) जो यजमान सोमदेव को हवि रूप अन्न देता है, उसे वे दुधारू गाय, शीघ्रगामी अश्व एवं लौकिक कर्म करने में कुशल, गृहकार्य में दक्ष, यज्ञ का अनुष्ठान करने वाला, सकल ebook converter DEMO Watermarks*