भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 311, कुल 1855 में से

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हे उषा! तुम गौ, अश्व, सत्यभाषण एवं तेज से युक्त हो. आज हमारे यज्ञ को प्रकाशित करके धन से युक्त करो. (१४) युक्ष्वा हि वाजिनीवत्यश्वाँ अद्यारुणाँ उषः. अथा नो विश्वा सौभाग्यान्या वह.. (१५) हे अन्नयुक्त उषा! आज लाल रंग के घोड़े रथ में जोड़ो एवं समस्त सौभाग्य हमारे लिए लाओ. (१५) अश्विना वर्तिरस्मदा गोमद्दस्रा हिरण्यवत्. अर्वाग्रथं समनसा नि यच्छतम्.. (१६) हे शत्रुनाशक अश्विनीकुमारो! तुम दोनों समान विचार बनाकर हमारे घर को गायों एवं रमणीय धन से युक्त करने के लिए अपने रथ पर बैठकर हमारे घर को आओ. (१६) यावित्था श्लोकमा दिवो ज्योतिर्जनाय चक्रथुः. आ न ऊर्जं वहतमश्विना युवम्.. (१७) हे अश्विनीकुमारो! तुमने आकाश से प्रशंसनीय ज्योति नीचे भेजी है. तुम हमारे लिए बल देने वाला अन्न लाओ. (१७) एह देवा मयोभुवा दस्रा हिरण्यवर्तनी. उषर्बुधो वहन्तु सोमपीतये.. (१८) अश्विनीकुमार दानादिगुणयुक्त, आरोग्य एवं सुख देने वाले, स्वर्णनिर्मित रथ के स्वामी एवं शत्रुविध्वंसकारी हैं. उनके घोड़े सोमरस पीने के लिए उन्हें इस यज्ञ में लावें. (१८) सूक्त—९३ देवता—अग्नि एवं सोम अग्नीषोमाविमं सु मे शृणुतं वृषणा हवम्. प्रति सूक्तानि हर्यतं भवतं दाशुषे मयः.. (१) हे कामवर्षक अग्नि एवं सोम! इस आह्वान को सुनो, हमारी स्तुतियों को स्वीकार करो एवं हव्य देने वाले यजमान को सुख देने वाले बनो. (१) अग्नीषोमा यो अद्य वामिदं वचः सपर्यति. तस्मै धत्तं सुवीर्यं गवां पोषं स्वश्व्यम्.. (२) हे अग्नि और सोम! जो यजमान आज तुम्हें स्तुति वचनों से पूजित करता है, उसे शक्तिशाली गाएं एवं पुष्ट अश्व दो. (२) ebook converter DEMO Watermarks*

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