भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 342, कुल 1855 में से

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होते हुए भी अमरता प्राप्त की थी. उस समय सुधन्वा के पुत्र एवं सूर्य के समान तेजस्वी ऋभुओं ने संवत्सर पर्यन्त चलने वाले यज्ञों में अधिकार प्राप्त किया था. (४) क्षेत्रमिव वि ममुस्तेजनेनँ एकं पात्रमृभवो जेहमानम्. उपस्तुता उपमं नाधमाना अमर्त्येषु श्रव इच्छमाना:.. (५) जिस प्रकार नापने का बांस लेकर खेत नापा जाता है, उसी प्रकार समीपस्थ ऋषियों द्वारा स्तुत ऋभुओं ने प्रशंसनीय सोम की याचना करके एवं मरणरहित देवों के बीच में हव्य की इच्छा करके तीक्ष्ण अस्त्र द्वारा चमस नाम के यज्ञपात्र को चार भागों में बांटा था. (५) आ मनीषामन्तरिक्षस्य नृभ्यः सुचेव घृतं जुहवाम विद्मना. तरणित्वा ये पितुरस्य संश्चिर ऋभवो वाजमरुहन्दिवो रजः.. (६) हम अंतरिक्ष संबंधी यज्ञ को नेता ऋभुओं को सुच नामक पात्र के समान घी से भरा हुआ हव्य देने के साथ ही ज्ञान भरी स्तुति करते हैं. उन्होंने जगत्पालक सूर्य के समान संसार को पार करने की कुशलता एवं स्वर्गलोक का अन्न प्राप्त किया था. (६) ऋभुर्न इन्द्रः शवसा नवीयान्भुर्वाजेभिर्वसुभिर्वसुर्ददिः. युष्माकं देवा अवसाहनि प्रियेऽभि तिष्ठेम पृत्युतीरसुन्वताम्.. (७) बल के कारण अतिप्रसिद्ध ऋभुगण हमारे ईश्वर हैं. हमें अन्न एवं धन के देने वाले ऋभु निवास के कारण हैं, इसलिए वे हमें वरदान दें. हे देवो! हम तुम्हारी रक्षा के कारण अनुकूल दिन में सोमाभिषवरहित शत्रुओं को हरा दें. (७) निश्शर्मण ऋभवो गामपिंशत सं वत्सेनासृजता मातरं पुनः. सौधन्वनासः स्वपस्यया नरो जिब्री युवाना पितराकृणोतन.. (८) हे ऋभुओं! तुमने चमड़े के द्वारा गाय को आच्छादित करके पुनः उसके बछड़े से मिला दिया था. हे सुधन्वा के पुत्रों एवं यज्ञ के नेताओ! तुमने शोभन कर्म की इच्छा से अपने वृद्ध माता-पिता को पुनः युवा बना दिया है. (८) वाजेभिर्नो वाजसातावनिङ्घ्यूभुमाँ इन्द्र चित्रमा दर्षि राधः. तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः.. (९) हे इंद्र! ऋभुओं का सहयोग पाकर हमें यज्ञ के निमित्त भूत अन्न एवं धन दो. मित्र, वरुण, अदिति, सिंधु, धरती एवं आकाश हमारे उस धन एवं अन्न की पूजा करें. (९) सूक्त—१११ देवता—ऋभुगण तक्षन्नथं सुवृतं विद्मनापसस्तक्षन्हरी इन्द्रवाहा वृषण्वसू. ebook converter DEMO Watermarks*