भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 354, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 354

सूर्यो देवीमुषसं रोचमानां मर्यो न योषामभ्येति पश्चात्. यत्रा नरो देवयन्तो युगानि वितन्वते प्रति भद्राय भद्रम्.. (२) सूर्य दीप्यमान उषा का अनुगमन उसी प्रकार करता है, जिस प्रकार पुरुष नारी के पीछे- पीछे चलता है. इसी समय लोग सूर्य संबंधी यज्ञ करने की इच्छा से कार्य विस्तार करते हैं. कल्याण पाने के लिए हम सूर्य की स्तुति करते हैं. (२) भद्रा अश्वा हरितः सूर्यस्य चित्रा एतग्वा अनुमाद्यासः. नमस्यन्तो दिव आ पृष्ठमस्थुः परि द्यावापृथिवी यन्ति सद्यः.. (३) सूर्य के कल्याणकारक, विचित्र लोगों द्वारा क्रमशः स्तुत एवं हमारे द्वारा नमस्कृत हरित नाम के घोड़े आकाश के ऊपर उपस्थित होकर शीघ्र ही धरती और आकाश का परिभ्रमण कर लेते हैं. (३) तत्सूर्यस्य देवत्वं तन्महित्वं मध्या कर्तोर्विततं सं जभार. यदेदयुक्त हरितः सधस्थादाद्रात्री वासस्तनुते सिमस्मै.. (४) यही सूर्य का ईश्वरत्व और महत्त्व है कि वह संसार के कर्म समाप्त होने से पहले ही विश्व में फैली अपनी किरणें समेट लेते हैं. वे जब अपने रथ से हरित नामक घोड़ों को अलग करते हैं, तभी रात्रि इस प्रकार अंधकार फैलाती है, जैसे जगत् पर परदा डाल रही हो. (४) तन्मित्रस्य वरुणस्याभिचक्षे सूर्यो रूपं कृणुते द्योरुपस्थे. अनन्तमन्यद्रुशदस्य पाजः कृष्णमन्यद्धरितः सं भरन्ति.. (५) सूर्य धरती और आकाश के बीच अपना सर्वप्रकाशक तेज इसलिए फैलाते हैं, जिससे मित्र और वरुण उन्हें सम्मुख देख सकें. सूर्य के घोड़े एक ओर अवसानरहित, जगत्प्रकाशक बल एवं दूसरी ओर काले रंग का अंधेरा धारण करते हैं. (५) अद्या देवा उदिता सूर्यस्य निरंहसः पिपृता निरवद्यात्. तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः.. (६) हे सूर्यकिरणो! इस सूर्योदय के समय हमें पापों से बचाओ. मित्र, वरुण, अदिति, सिंधु, पृथ्वी एवं आकाश हमारी इस प्रार्थना को स्वीकार करें. (६) सूक्त—११६ देवता—अश्विनीकुमार नासत्याभ्यां बर्हिरिव प्र वृञ्जे स्तोमाँ इयर्म्यभ्रियेव वातः. यावर्भगाय विमदाय जायां सेनाजुवा न्यूहतू रथेन.. (१) जिस प्रकार कोई यजमान यज्ञ के निमित्त कुश छेदन करता है अथवा वायु बादलों के ebook converter DEMO Watermarks*