भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 355, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 355

जल को प्रेरित करता है, उसी प्रकार मैं अश्विनीकुमारों की पर्याप्त स्तुति करता हूं. उन्होंने किशोर विमद को अपने रथ द्वारा शत्रुओं से पहले ही स्वयंवर में पहुंचाकर पत्नी प्राप्त कराई थी. उनके रथ को शत्रु सेना नहीं पा सकी. (१) वीळुपत्मभिराशुहेमभिर्वा देवानां वा जूतिभिः शाशदाना. तद्रासभो नासत्या सहस्रमाजा यमस्य प्रधने जिगाय.. (२) हे अश्विनीकुमारो! तुम अपने बलपूर्वक उछलने वाले एवं शीघ्रगामी अश्वों तथा इंद्रादि देवों की प्रेरणाओं से प्रेरित हो. तुम्हारा वाहन रासभ इंद्र को प्रसन्न करने वाले बहुधनशाली संग्रामों में हजारों बार विजयी हुआ था. (२) तुग्रो ह भुज्युमश्विनोदमेघे रयिं न कश्चिन्ममृवाँ अवाहाः. तमूहथुर्नौभिरात्मन्वतीभिरन्तरिक्षप्रुद्भिरपोदकाभिः.. (३) हे अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार कोई मरता हुआ व्यक्ति धन का त्याग करता है, उसी प्रकार शत्रुपीड़ित तुग्र ने अपने पुत्र थुज्यु को शत्रु विजय के लिए नाव से गमन करने के निमित्त सागर में भेजा. तुमने सागर में डूबते हुए भुज्यु को अंतरिक्ष में चलने वाली एवं जलप्रवेशरहित अपनी नाव द्वारा तुग्र के पास पहुंचाया था. (३) तिस्रः क्षपस्त्रिरहातिव्रजद्भिर्नासत्या भुज्युमूहथुः पतङ्गैः. समुद्रस्य धन्वन्नार्द्रस्य पारे त्रिभी रथैः शतपद्भिः षळश्वैः.. (४) हे अश्विनीकुमारो! तुमने भुज्यु को सौ पहियों वाले, छह घोड़ों से खींचे जाते हुए, तीन दिन एवं तीन रात से अधिक चलने वाले तीन शीघ्रगामी रथों द्वारा जलपूर्ण सागर के जलहीन किनारे पर पहुंचाया था. (४) अनारम्भणे तदवीरयेथामनास्थाने अग्रभणे समुद्रे. यदश्विना ऊहथुर्भुज्युमस्तं शतारित्रां नावमातस्थिवांसम्.. (५) हे अश्विनीकुमारो! तुमने सागर में डूबते हुए भुज्यु को सौ डांडों से चलने वाली नौका में बैठाकर अपने घर पहुंचाया था. वह सागर आलंबनरहित, भू प्रदेश से भिन्न, हाथ से पकड़ने योग्य शाखा आदि से हीन था, जिसमें तुमने यह पराक्रम किया. (५) यमश्विना ददथुः श्वेतमश्वमघाश्वाय शश्वदित्स्वस्ति. तद्वां दात्रं महि कीर्तेन्यं भूत्पैद्वो वाजी सदिमद्धिद्वयो अर्यः.. (६) हे अश्विनीकुमारो! तुमने अघाश्व पेदु को नित्यविजय दिलाने वाला श्वेत अश्व दिया था. तुम्हारा वह दान महान् एवं प्रशंसनीय है एवं पेदु का उत्तम अश्व सदा हमारा आदरणीय रहेगा. (६) ebook converter DEMO Watermarks*

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