ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 366, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंउस रथ के चलते ही अश्विनीकुमारों की स्तुति में हमारी बुद्धि ऊर्ध्वमुखी हो जाती है. हमारी स्तुतियां उनके पास पहुंचती हैं. हम हव्य को स्वादपूर्ण बनाते हैं. रक्षक आते हैं. हे अश्विनीकुमारो! ऊर्जांनी नाम की सूर्यपुत्री तुम्हारे रथ पर चढ़ी थी. (२) सं यन्मिथः पस्पृधानासो अग्मन् शुभे मखा अमिता जायवो रणे. युवोरह प्रवणे चेकिते रथो यदश्विना वहथः सूरिमा वरम्.. (३) हे अश्विनीकुमारो! यज्ञ करने वाले अगणित जयशील मनुष्य संग्राम में शोभन धनप्राप्ति के लिए स्पर्धा करते हुए जब मिलते हैं, तभी उत्तम धरती पर तुम्हारा रथ दिखाई देता है. तुम उसी रथ पर स्तोता के लिए धन लाते हो. (३) युवं भुज्युं भुरमाणं विभिर्गतं स्वयुक्तिभिर्निर्वहन्ता पितृभ्य आ. यासिष्टं वर्तिर्वृषणा विजेन्यं१ दिवोदासाय महि चेति वामवः.. (४) हे कामवर्षको! तुमने घोड़ों द्वारा लाए हुए एवं सागर में डूबे हुए भुज्यु को अपने स्वयं युक्त घोड़ों द्वारा लाकर उनके पिता के समीप, दूरस्थ घर में पहुंचा दिया था. तुमने दिवोदास की जो महती रक्षा की थी, उसे हम जानते हैं. (४) युवोरश्विना वपुषे युवायुजं रथं वाणी येमतुरस्य शर्ध्यम्. आ वां पतित्वं सख्याय जग्मुषी योषावृणीत जेन्य युवां पती.. (५) हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारे प्रशंसनीय अश्व तुम्हारे जुड़े हुए रथ को दौड़ की सीमा, सूर्य तक सबसे पहले ले गए थे. जीती हुई कुमारी ने मित्रता के लिए आकर कहा था कि मैं तुम्हारी पत्नी हूं और तुम्हें अपना पति बना लिया. (५) युवं रेभं परिषूतेरुरुष्यथो हिमेन घर्मं परितप्तमत्रये. युवं शयोरवसं पिप्यथुर्गवि प्र दीर्घेण वन्दनस्तार्यायुषा.. (६) तुमने रथ को चारों ओर के उपद्रव से बचाया, अत्रि ऋषि को जलाने के लिए असुरों द्वारा लगाई हुई आग शीतल जल से बुझाई, शंयु की गाय को दुधारू बनाया एवं वंदन ऋषि को दीर्घ आयु दी. (६) युवं वन्दनं निर्ऋतं जरण्यया रथं न दस्रा करणा समिन्वथः. क्षेत्रादा विप्रं जनथो विपन्यया प्र वामत्र विधते दंसना भुवत्.. (७) हे कुशल अश्विनीकुमारो! जैसे शिल्पी पुराने रथ को नया कर देता है, उसी प्रकार तुमने बुढ़ापे से ग्रस्त वंदन ऋषि को दोबारा युवा बना दिया था. गर्भस्थ कामदेव की स्तुति से प्रसन्न होकर तुमने उस मेधावी को माता के उदर से बाहर निकाला. तुम्हारा वही रक्षाकर्म सेवा करने वाले यजमान को प्राप्त हो. (७) ebook converter DEMO Watermarks*