ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 365, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंऋषि को नेत्र दिए. (७) युवं धेनुं शयवे नाधितायापिन्वतमश्विना पूर्व्याय. अमुञ्चतं वर्तिकामंहसो निः प्रति जङ्घां विशपलाया अधत्तम्.. (८) हे अश्विनीकुमारो! तुमने अपने प्राचीन याचक शंयु ऋषि के लिए गाय को दुधारू किया था. तुमने वर्तिका को पाप से बचाया एवं विशपला को दूसरी जंघा लगाई थी. (८) युवं श्वेतं पेदव इन्द्रजूतमहिहनमश्विनादत्तमश्वम्. जोहूत्रमर्यो अभिभूतिमुग्रं सहस्रसां वृषणं वीळ्वङ्गम्.. (९) हे अश्विनीकुमारो! तुमने राजा पेदु को श्वेत-वर्ण, इंद्रप्रदत्त, शत्रुहंता एवं संग्राम में शत्रुओं को ललकारने वाला, शत्रुपराभवकारी, उग्र, हजारों धन देने वाला, सेचन समर्थ एवं दृढांग घोड़ा दिया था. (९) ता वां नरा स्ववसे सुजाता हवामहे अश्विना नाधमानाः. आ न उप वसुमता रथेन गिरो जुषाणा सुविताय यातम्.. (१०) हे नेता एवं शोभनजन्म वाले अश्विनीकुमारो! धन की याचना करते हुए हम तुम्हें रक्षा के लिए बुलाते हैं. तुम हमारी स्तुतियों को स्वीकार करके हमें सुख देने के लिए अपने धनयुक्त रथ द्वारा हमारे सामने आओ. (१०) आ श्येनस्य जवसा नूतनेनास्मे यातं नासत्या सजोषाः. हवे हि वामश्विना रातहव्यः शश्वत्तमाया उषसो व्युष्टौ.. (११) हे सत्यस्वरूप अश्विनीकुमारो! तुम समान प्रीतयुक्त एवं प्रशंसनीय गति वाले घोड़े के नए वेग से युक्त होकर हमारे समीप आओ. हम तुम्हें देने योग्य हवि लेकर नित्य उषा के उदय काल में बुलाते हैं. (११) सूक्त—११९ देवता—अश्विनीकुमार आ वां रथं पुरुमायं मनोजुवं जीराश्वं यज्ञियं जीवसे हुवे. सहस्रकेतुं वनिनं शतद्वसुं श्रुष्टीवानं वरिवोधामभि प्रयः.. (१) हे अश्विनीकुमारो! मैं जीवन एवं अन्न प्राप्ति के लिए तुम्हारे आश्चर्यपूर्ण, मन के समान शीघ्र चलने वाले, वेगशील अश्वों से युक्त, यज्ञों में बुलाने योग्य हजार झंडों वाले, उदकपूर्ण, सौ धनों सहित, शीघ्रगामी एवं धन देने वाले रथ का आह्वान करता हूं. (१) ऊर्ध्वा धीतिः प्रत्यस्य प्रयामन्धायि शस्मन्त्सम्यन्त आ दिशः. स्वदामि घर्मं प्रति यन्त्यूतय आ वामूर्जानी रथमश्विनारुहत्.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*