भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 370, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 370

हे क्षिप्रकारी इंद्र! तुम्हारे लिए जगत् के माता-पिता, धरती और आकाश ने बलवर्धक, वीर्यसंपन्न एवं धनयुक्त दुधारू गायों का दूध जिस समय अग्नि में अर्पित किया, तभी तुमने पणियों का द्वार खोल दिया था. (५) अध प्र जज्ञे तरणिर्ममत्तु प्र रोच्यस्या उषसो न सूरः. इन्दुर्यैभिर्राष्ट स्वेदुहव्यैः सुवेण सिञ्चञ्जजरणाभि धाम.. (६) उषा के समीपवर्ती सूर्य के समान चमकते हुए शत्रुविजयी इंद्र इस समय प्रकट हुए हैं. वे हमें प्रसन्न बनावें. हम भी स्तुतिपात्र सोमरस को स्रुच से यज्ञस्थल में छिड़कते हुए पीते हैं. (६) स्विध्मा यद्धनधितिरपस्यात्सूरो अध्वरे परि रोधना गोः. यद्ध प्रभासि कृत्व्याँ अनु द्यूननर्विशे पश्विषे तुराय.. (७) प्रकाशयुक्त मेघमाला जिस समय अपना कर्म करने को तत्पर होती है, उस समय प्रेरक इंद्र यज्ञ के निमित्त वर्षा का आवरण दूर करते हैं. हे इंद्र! तुम जब कार्य योग्य दिवसों को प्रकाशित करते हो, तब गाड़ी वाले एवं चरवाहे अपने काम में शीघ्र सफल होते हैं. (७) अष्टा महो दिव आदो हरी इह द्युम्नासाहमभि योधन उत्सम्. हरिं यत्ते मन्दिनं दुक्षन्व्धे गोरभसमद्रिभिर्वाताप्यम्.. (८) जब ऋत्विज् तुम्हारी बुद्धि के लिए मनोहर, मादक, बलकारी, एवं उपभोग योग्य सोमरस को पत्थरों की सहायता से निचोड़ें, तब तुम अपने हर्षदाता एवं सोमरस का भोग करने वाले दोनों घोड़ों को इस यज्ञ में सोम पिलाओ एवं हमारे धन का अपहरण करने वाले शत्रुओं को हराओ. (८) त्वमायसं प्रति वर्तयो गोर्दिवो अश्मानमुपनीतमृभ्वा. कुत्साय यत्र पुरुहूत वन्वञ्छुष्णमनन्तैः परियासि वधैः.. (९) हे इंद्र! तुमने आकाश से ऋभु द्वारा लाए गए, शत्रु के प्रति शीघ्र जाने वाले लौहमय वज्र को गमनशील शुष्ण असुर की ओर फेंका था. हे पुरुहूत! उस समय तुमने कुत्स ऋषि के कल्याण के लिए शुष्ण को अनेकविध हनन साधनों से हिंसा करते हुए छेड़ा था. (९) पुरा यत्सूरस्तमसो अपीतेस्तमद्रिवः फलिगं हेतिमस्य. शुष्णस्य चित्परिहितं यदोजो दिवस्परि सुग्रथितं तदादः.. (१०) हे वज्रधारक! प्राचीन काल में जब सूर्य अंधकार के साथ हुए संग्राम से निवृत्त हुए, उस समय तुमने मेघ का विनाश किया. सूर्य को आच्छादित करने एवं सूर्य में संलग्न होने वाले शुष्ण के बल को तुमने समाप्त कर दिया था. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*