ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 374, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंएतं शर्धं धाम यस्य सूरेरित्यवोचन्दशतयस्य नंशे. द्युम्नानि येषु वसुताती रारन्विश्वे सन्वन्तु प्रभृथेषु वाजम्.. (१२) जिन देवों ने यह कहा कि हमने उस यजमान को विजय का साधन बल प्रदान किया, जिसके दस इंद्रियपोषक सोम को ग्रहण करने के लिए हम आए हैं, ऐसे देवों का प्रकाशवान् अन्न एवं विस्तृत धन अत्यंत शोभा पाता है. समस्त देव उत्तम यज्ञों में हमें अन्न प्रदान करें. (१२) मन्दामहे दशतयस्य धासेर्द्धिर्यतपञ्च बिभ्रतो यन्त्यन्ना. किमिष्टाश्व इष्टरश्मिरेत ईशानासस्तरुष ऋञ्जते नॄन्.. (१३) जब-जब हम विश्वदेवों की स्तुति करते हैं, तब-तब ऋत्विज् दस प्रकार की इंद्रियों को पुष्ट करने वाले दस प्रकार के अन्नों को धारण करके यज्ञ मंडप की ओर चलते हैं. इष्टाश्व एवं इष्टरश्मि नाम के राजा शत्रुनाशक एवं नेता-रूप वरुण आदि देवताओं को बिलकुल प्रसन्न नहीं कर सकते. (१३) हिरण्यकर्णं मणिग्रीवमर्णस्तन्नो विश्वे वरिवस्यन्तु देवा:. अर्यो गिर: सद्य आ जग्मुषीरोसाश्चाकन्तूभयेष्वस्मे.. (१४) समस्त देव हमें ऐसे सुंदर पुत्र दें जो कानों में स्वर्णाभूषण एवं ग्रीवा में रत्नमाला धारण करते हों. समस्त आदरणीय देवों का समूह हमारे आने के तुरंत बाद ही स्तुतियों एवं हव्य की अभिलाषा करे. (१४) चत्वारो मा मशर्शारस्य शिश्वस्त्रयो राज्ञ आयवसस्य जिष्णो:. रथो वां मित्रावरुणा दीर्घाप्सा: स्यूमगभस्ति: सूरो नाद्यौत्.. (१५) मशशरि राजा के चार एवं जयशील अयवस राजा के तीन पुत्र मुझ कक्षीवान् को कष्ट पहुंचाते हैं. हे मित्र और वरुण! तुम्हारा अत्यंत विस्तृत एवं सुखकर प्रकाश वाला रथ सूर्य के समान चमकता है. (१५) सूक्त—१२३ देवता—उषा पृथू रथो दक्षिणाया अयोज्यैनं देवासो अमृतासो अस्थु:. कृष्णा दुदस्थादर्या३ विहायाश्चिकित्सन्ती मानुषाय क्षयाय.. (१) अपने व्यापार में कुशल उषा देवी के रथ में घोड़े जोड़े गए. उस रथ में मरणरहित देवसमूह यज्ञ में जाने के लिए बैठ गया. पूजा के योग्य एवं विविध गमन वाली उषा काले रंग के अंधकार से उत्पन्न होती है एवं अंधकार निवारण रूपी चिकित्सा करती हुई मानवों के निवासस्थान की ओर आती है. (१) ebook converter DEMO Watermarks*