ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 375, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वा विश्वस्माद्भुवनादबोधि जयन्ती वाजं बृहती सनुत्री. उच्चा व्यख्यद्युवतिः पुनर्भूरोषा अगन्प्रथमा पूर्वहूतौ.. (२) गमनशील प्रकाश द्वारा अंधकार पर विजय प्राप्त करने वाली, महती एवं विश्व को सुख देने वाली उषा समस्त प्राणियों से पहले जागती है. वह नित्य यौवना उषा पुनः पुनः उत्पन्न होती है. सारे संसार को देखती हुई वह हमारे एक बार बुलाने पर ही आ जाती है. (२) यदद्य भागं विभजासि नृभ्य उषो देवि मर्त्यत्रा सुजाते. देवो नो अत्र सविता दमूना अनागसो वोचति सूर्याय.. (३) हे सुजाता एवं मानवपालिका उषादेवी! तुम इस समय मनुष्यों के लिए अपने प्रकाश का जो अंश देती हो, उसीको हमें सविता देव प्रदान करें तथा हमारे यज्ञस्थल में सूर्य के आगमन के निमित्त हमें पापरहित कहकर अनुगृहीत करें. (३) गृहङ्गहमहना यात्यच्छा दिवेदिवे अधि नामा दधाना. सिषासन्ती द्योतना शश्वदागादग्रमग्रमिद्भजते वसूनाम्.. (४) भोग की इच्छा से युक्त एवं सारे संसार को प्रकाशित करती हुई उषा प्रतिदिन नम्र भाव से प्रत्येक घर की ओर आती है एवं हवि-रूप धन का श्रेष्ठ भाग स्वीकार कर लेती है. (४) भगस्य स्वसा वरुणस्य जामिरुषः सूनृते प्रथमा जरस्व. पश्चा स दघ्या यो अघस्य धाता जयेम तं दक्षिणया रथेन.. (५) हे उषा! तुम मनुष्यों की शोभन नेत्री हो. तुम आदित्य की स्वसा एवं अंधकार निवारक सविता की भगिनी तथा अन्य देवों की अपेक्षा श्रेष्ठ हो. समस्त देव तुम्हारी स्तुति करें. तुम्हारी प्रसन्नता के पश्चात् जो दुःख देने वाला आएगा, हम तुम्हारी सहायता प्राप्त करके उसे अपने रथ आदि साधन से जीत लेंगे. (५) उदीरतां सूनृता उत्पुरन्धीरुरुद्ग्नयः शुशुचानासो अस्थुः. स्पार्हा वसूनि तमसापगूळ्हाविष्कृणवन्त्युषसो विभातीः.. (६) हे ऋत्विजो! प्रिय एवं सच्ची बातें स्तुति रूप में कहो, बुद्धि का प्रमाण देने वाले यज्ञकर्म करो तथा दीप्तिशाली अग्नि प्रज्वलित करो. ऐसा करने से विविध प्रकाश वाली उषा अंधकार से ढके हुए एवं यज्ञसाधन धनों को प्रकट करती है. (६) अपान्यदेत्यभ्य१न्येदेति विषुरूपे अहनी सं चरेते. परिक्षितोस्तमो अन्या गुहाकरद्यौदुषाः शोशुचता रथेन.. (७) नाना रूपवान् अहोरात्र—दोनों देवता व्यवधान रहित होकर चलते हैं. वे एक-दूसरे के विरुद्ध गति वाले हैं. एक आता है तो दूसरा जाता है. बारीबारी से आने वाले इन देवताओं में ebook converter DEMO Watermarks*