भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 379, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 379

वि नूनमुच्छादसति प्र केतुर्गृहंगृहमुप तिष्ठाते अग्निः.. (११) युवती के समान पूर्व दिशा से आती हुई उषा अपने रथ में लाल रंग के बैलों को जोड़ती है. यह रूपरहित आकाश में अंधकार को मिटाती है. उषा के आने पर ही सब घरों में आग जलती है. (११) उत्ते वयश्चिद्वसतेरपप्तन्नरश्च ये पितुभाजो व्युष्टौ. अमा सते वहसि भूरि वाममुषो देवि दाशुषे मर्त्याय.. (१२) हे उषा! तुम्हारे प्रकट होते ही पक्षी अपने घोंसलों से उड़ने लगते हैं और मनुष्य अन्न प्राप्ति की इच्छा से अपने-अपने कर्म में उन्मुख होते हैं. हे देवी उषा! जो हव्यदाता यजमान देवयजन मंडप में स्थित है, उसके लिए पर्याप्त धन दो. (१२) अस्तोढ्वं स्तोम्या ब्रह्मणा मे ऽवीवृध्वध्वमुशतीरुषासः. युष्माकं देवीरवसा सनेम सहस्रिणं च शतिनं च वाजम्.. (१३) हे स्तुति योग्य उषाओ! मेरे मंत्र तुम्हारी स्तुति करें. तुम हमारी उन्नति चाहती हुई हमारी वृद्धि करो. हे उषा देवियो! तुम यदि हमारी रक्षा करोगी तो हम हजारों और सैकड़ों धन प्राप्त करेंगे. (१३) सूक्त—१२५ देवता—दान प्राता रत्नं प्रातरित्वा दधाति तं चिकित्त्वान्प्रतिगृह्या नि धत्ते. तेन प्रजां वर्धयमान आयू रायस्पोषेण सचते सुवीरः.. (१) स्वनय नाम का राजा प्रातःकाल आकर मेरे समीप रत्न रखे. ज्ञानी कक्षीवान् अर्थात् मैंने उन्हें स्वीकार किया एवं उनके द्वारा पुत्र, सेवक एवं अपनी अवस्था में वृद्धि करके राजा को आशीर्वाद दिया है कि वह बार-बार धन प्राप्त करे. (१) सुगुरसत्सुहिरण्यः स्वश्वो बृहदस्मै वय इन्द्रो दधाति. यस्त्वायन्तं वसूनां प्रातरित्वो मुक्षीजयेव पदि मुत्सिनाति.. (२) यह स्वनय राजा बहुत सी गायों, स्वर्ण और घोड़ों का स्वामी है. इंद्र इन्हें अतुल संपत्ति दें. जिस प्रकार पशु-पक्षी आदि को रस्सी से बांध लिया जाता है, उसी प्रकार राजा ने प्रातःकाल ही पैदल आकर जाने वाले यात्री कक्षीवान् को जाने नहीं दिया. (२) आयमद्य सुकृतं प्रातरिच्छन्निष्टेः पुत्रं वसुमता रथेन. अंशोः सुतं पायय मत्सरस्य क्षयद्वीरं वर्धन्ध सूनृताभिः.. (३) मैं शोभनकर्मा एवं यज्ञरक्षक को देखने के लिए धनयुक्त रथ में बैठकर आज आया हूं. ebook converter DEMO Watermarks*